अभियान का नाम नया

समस्याएं वही पुरानी

-आदिवासी भाषा में दिया नाम, ग्रामीणों को नहीं रुचि

झाबुआ। नईदुनिया प्रतिनिधि

आदिवासी भाषा में फलिया नू जात्रा नाम देकर 8 जनवरी से अभियान आरंभ किया गया है लेकिन उसमें समस्याएं वहीं पुरानी आ रही हैं। ग्रामीणों में अभियान को लेकर ज्यादा रुचि नहीं दिख रही है, क्योंकि पूर्व में भी इस तरह के कई अभियान चलते रहे है। दिक्कत यह है कि उन अभियानों में बताई गई समस्या ही अभी तक नहीं निपटी है। ऐसे में चाहे अभियान का नाम नया दे दिया गया हो, मैदान में बहुत अधिक सार्थकता नजर नहीं आ रही है।

ग्राम उदय से भारत उदय अभियान लगातार संचालित हो रहा है। इसमें ग्रामीण अपनी समस्याएं बार-बार शासकीय अधिकारियों को बता चुके है। समस्याओं के पुलिंदे भी तैयार हुए, लेकिन हल कुछ भी नहीं निकला। अब जब देशी भाषा का नाम देते हुए अभियान नए सिरे से छेड़ा गया है तो नए नाम के अलावा इसमें ग्रामीणों को कुछ भी आकर्षक नजर नहीं आ रहा।

यह है स्थानीय अभियान

रानापुर विकासखंड को छोड़कर जिले के शेष 5 विकासखंडों में फलिया नू जात्रा अभियान 8 जनवरी से आरंभ किया गया है। किसी विकासखंड में यह अभियान 40 दिन तो किसी में 30-32 दिन चलेगा। अभियान के तहत प्रतिदिन हर विकासखंड के किसी निर्धारित गांव में शासकीय अमला पहुंच रहा है। गांव के फलियों-फलियों में यात्रा करते हुए ग्रामीणों की समस्या पूछी जा रही है। इन समस्याओं की सूची तैयार हो रही है।

फैक्ट फाइल

-5 विकाखंडों में संचालित हो रहा अभियान

-8 लाख के लगभग इनमें आबादी

-8 जनवरी से अभियान हुआ आरंभ

-40 दिन पेटलावद विकासखंड में चलेगा

-30-32 दिन अन्य विकासखंडों में

हो रही औपचारिकताएं

खुलकर तो शासकीय अमला कुछ नहीं बोल सकता, क्योंकि स्थानीय स्तर पर आरंभ हुआ यह अभियान जिला प्रशासन का है। मजबूरीवश उन्हें गांव-गांव जाना पड़ रहा है। दबी जुबान वे कह रहे है कि अन्य शासकीय कार्य प्रभावित हो रहे है। उधर ग्रामीण भी बहुत अधिक इस अभियान महत्व नहीं दे रहे है। उन्हें लग रहा है कि समस्या बार-बार पूछी जा रही है। निराकरण कोई नहीं कर रहा।