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नईदुनिया पड़ताल.....

वर्षों पहले सरकारी आवास

में मनती थी हनुमान जयंती

- 250 वर्षों से जल रही अखंड ज्योत

-जेल बगीचे में पहले कैदी करते थे बाबा की सेवा

झाबुआ। नईदुनिया प्रतिनिधि

शहर में हनुमान जयंती मनाने के लिए वर्षों पहले एक सरकारी आवास का भी भरपूर उपयोग होता था। वजह यह थी कि उस आवास में रहने वाले तत्कालीन कोषालय अधिकारी ओएल कटारिया स्वयं हनुमान भक्त थे। उनके सरकारी आवास पर ही कष्टभंजन देव की मूर्ति स्थापित करते हुए उसे अक्षयधाम तीर्थ घोषित कर दिया गया था। 1998 में आरंभ हुआ यह सिलसिला वर्षों तक चलता रहा। उसके बाद तबादला होने से कटारिया भले ही चले गए, लेकिन आज 70 साल की उम्र में भी वे हनुमान जयंती पर झाबुआ जरूर आते हैं। जेल बगीचे में हनुमानजी का दरबार बहुत पुराना है। पहले यहां कैदी ही बाबा की सेवा करते थे। कॉलेज मार्ग के पुराने हनुमान दरबार में भी 250 वर्ष से अखंड ज्योत जल रही है।

शहर के चारों ओर से रामभक्त हनुमानजी सेवा की जा रही है। हर कोने में हनुमानजी को श्रद्धालुओं ने विराजित कर रखा है। यहां लगभग 13 स्थान अलग-अलग क्षेत्रों में आस्था का केंद्र बने हुए हैं। हर स्थान की अपनी महिमा व महत्व है। हनुमान भक्त दशरथनंदन जानी का कहना है कि हनुमान जयंती धूमधाम से मनाने की शुरुआत सरकारी आवास से ही हुई थी। इसके बाद सिलसिला अन्य मंदिरों में भी शुरू हो गया। कई मंदिर वर्षों पुराने है तो कुछ 3-4 दशक में स्थापित किए गए।

कैदी करते थे सेवा

जेल बगीचे में बावडी बनाने के अलावा रियासत काल से ही एक शानदार बगीचा बना हुआ था। यह बात अलग है कि अब खत्म कर दिया गया। यहां कैदी आकर श्रमदान करते थे। बालाजी का मंदिर स्थापित किया गया था। कैदी ही बाबा की नियमित सेवा किया करते थे। पिछले कुछ सालों से यहां की समिति सक्रिय रूप से कार्य कर रही है।

हनुमानजी की खड़ी मूर्ति स्थापित

कॉलेज मार्ग पर शुक्ला परिवार के निजी आवास में ही वर्षों पुराना मंदिर है। जानी का कहना है कि यहां 250 वर्ष से अखंड ज्योत जल रही है। हनुमानजी की खड़ी मूर्ति है। अत्यंत ही चमत्कारिक स्थान है। कई लोगों ने यहां तपस्या की है। सर्किट हाउस के पास ही राजा दिलीपसिंह के समय पश्चिम मुखी हनुमान मंदिर है। यहां भी अखंड ज्योत जलती है।

हनुमानजी और कृष्णजी साथ-साथ

रंगपुरा में लगभग 125 वर्ष पहले दीवानजी ने हनुमान जी का मंदिर बनवाया था। यहां सुंदरकांड का आयोजन नियमित किया जाता है। रियासत काल से ही वाडी हनुमान मंदिर भी आस्था का केंद्र बना हुआ है। कहते हैं कि यहां की मुर्ति स्वयंभू है। तुलसी गली का खेडापति हनुमान मंदिर भी अत्यंत ही प्राचीन है। खास बात यह है कि यहां हनुमान जी के साथ कृष्ण जी है। यहां की मुर्ति एक अनुपयोगी बन चुके स्थान से प्रकट हुई थी। पैलेस गार्डन के ठीक सामने ओटला बनाकर बाल हनुमान जी को भी यहां स्थापित कर रखा है।

ऊपर से सीढ़ियां बनना शुरू हुई

हनुमान टेकरी का संकटमोचन हनुमान मंदिर जन-जन की आस्था का केंद्र है। 1975 में यहां ऊंची पहाडी पर स्थित मंदिर में जाने के लिए मुश्किल होती थी। यहां ऊपर से सीढी बनाने का कार्य शुरू करते हुए नीचे तक लाया गया। 55-60 सीढियां है। कृषि विभाग परिसर का बालाजी धाम भी पहाडी पर बनाया गया। गडवाडा में हनुमान मंदिर की स्थापना के बाद यहां नवरात्र में मस्तराम बाबा ने समाधि ली। अपने शरीर पर जवारे उगाए। सिद्धेश्वर कॉलोनी के समीप भी हनुमानजी विराजित है। रामद्वारे पर 8-9 साल पहले पंचमुखी हनुमान मंदिर का निर्माण किया गया। यहां बजरंगबाण मंडल हर हनुमान जयंती पर भंडारा करवाता है।

17 जेएचए 29- झाबुआ के बालाजी धाम पर नियमित आयोजन हो रहे हैं।

17 जेएचए 30- जेल बगीचे में स्थित हनुमान मंदिर जन-जन की आस्था का केंद्र है।