शीर्षक सादा....

अब बिना किसी परेशानी के

घंटों रखा जा सकेगा शव

-झाबुआ मुक्तिधाम पर भोपाल से बनकर आई शव पेटी

झाबुआ। नईदुनिया प्रतिनिधि

शव के अंतिम संस्कार में किसी भी कारण से यदि देरी हो तो उसके देह की फजीहत हो जाती है। गर्मी में तो उसको लेकर बैठने वाले परिजन और समाजजन भी परेशान हो जाते हैं। अलग-अलग तरीकों से शव को खराब होने से रोका जाता है। अब इस सामाजिक समस्या का स्थाई हल झाबुआ में निकल गया है। माधोपुरा मुक्तिधाम को भोपाल से शव पेटी यानि मर्चरी मंगवाकर एक दानदाता ने दे दी है। अब यह कोई भी जरूरतमंद अपने घर ले जा सकेगा। इसमें कई घंटों तक शव को रखने पर भी कोई दिक्कत नहीं आएगी।

इस तरह की है मशीन

भोपाल से आई मशीन दो भागों में है। पहले यानि ऊपर के भाग में कांच का एक शॉकेस रहेगा। इसमें शव को रखा जाएगा। मशीन के दूसरे हिस्से में फ्रीजर दिया हुआ है। इस फ्रीजर से इतनी ठंडक शव को मिलेगी कि न तो बदबू आएगी और न ही शव खराब होगा। मशीन में पहिये लगे हुए हैं। किसी भी कारण से अंतिम संस्कार के लिए कुछ घंटे इंतजार करना है तो यह मशीन राहत प्रदान करेगी। माधोपुरा मुक्तिधाम से इस मशीन को कोई भी जरूरतमंद मंगवा सकेगा। लोडिंग रिक्शा से निःशुल्क घर तक मशीन लाने वाला दान दाता भी आगे आ गया है। फ्रीज की तरह यह मशीन बिजली से चलेगी। यदि बिजली गुल है तो जनरेटर व इनवेटर से भी इसको जोड़ा जा सकता है।

भोपाल के गुरुद्वारा में देखी

समिति के मनमोहन शाह भोपाल गए थे। वहां उन्होंने गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ईदगाह हिल्स के पास इस मशीन को देखा और समझा। झाबुआ आकर अपने साथी सुशील सिसोदिया इस बारे में चर्चा की। सिसोदिया ने बताया कि उनके साथ बैंक में नौकरी करने वाले नटवर सोनी अपनी पत्नी श्यामा सोनी की स्मृति में कुछ करना चाहते हैं। सिसोदिया ने उनके सामने प्रस्ताव रखा। सोनी तत्काल इस मामले में पूरी मदद करने को तैयार हो गए। अब उनके सौजन्य से झाबुआ के समाज को एक बड़ी सौगात मिल गई है।

गुरुवार को होगा मशीन का पूजन

संयोग यह है कि सोनी की पत्नी श्यामा सोनी की गुरुवार को पुण्यतिथि है और भोपाल से मशीन भी आ गई है। सुबह 9 बजे माधोपुरा मुक्तिधाम पर मशीन का पूजन रखा गया है। इस कार्यक्रम में सोनी परिवार व समाजजन एकत्रित होंगे।

यह मिलेगा फायदा

परिजनों के इंतजार में कई बार अंतिम संस्कार देरी से किया जाता है। ऐसे में शव को बर्फ की सिल्ली पर रखा जाता है। कमरे में लगातार पानी बहता रहता है। परिजन व मित्रों का बैठना मुश्किल हो जाता है। गर्मी के दिनों में व दुर्घटना या अन्य संक्रामक रोग से मौत होने पर शव को रखना एक बड़ी चुनौती होता है। कुछ घंटों बाद बदबू आने लगती है। बीमारी फैलने का डर रहता है। झाबुआ में लंबे समय से इस तरह की सुविधा मिलने की प्रतिक्षा थी।

17 जेएचए 28- झाबुआ के मुक्तिधाम पर इस तरह की रहेगी शव पेटी।