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पंखे के नीचे सोने को लेकर हुए विवाद में मासूम की जान गई

-बस स्टैंड पर मासूम की हत्या : पिता पर किया था वार, लग गया बेटी पर

- सिरफिरे आरोपित को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया

झाबुआ। नईदुनिया प्रतिनिधि

बस स्टैंड पर सोमवार अलसुबह करीब 4.30 बजे हुई मासूम की हत्या के मामले में जांच के बाद पुलिस ने खुलासा किया है कि पंखे के नीचे सोने को लेकर आरोपित व मासूम के पिता के बीच विवाद हुआ था। इसी विवाद में आरोपित ने पिता पर फालिये से वार किया, लेकिन वह पास में सो रही 7 वर्षीय बच्ची को गले में लग गया। इससे उसकी जान चली गई। फालिया आरोपित के सामान के साथ था। मजदूरी स्थल पर कई कामों के लिए यहां के मजदूर फालिया लेकर जाते हैं। सिरफिरे आरोपित ने अपने थैले में फालिया रखा था। जैसे ही विवाद हुआ, उसने तत्काल फालिया निकाल लिया। आरोपित पंखे के नीचे सोना चाहता था जबकि वहां पहले से पीड़ित परिवार सोया हुआ था। इसी बात को लेकर वह लगातार बड़बड़ा रहा था।

उल्लेखनीय है कि आरोपित छगन पिता सेकरिया कनेश निवासी आजादनगर आलीराजपुर ने झाबुआ बस स्टैंड यात्री प्रतीक्षालय में सो रही 7 वर्षीय बालिका का गला फालिये से रेत डाला था। इसके साथ ही तीन लोगों को गंभीर रूप से घायल कर दिया था। घटना के बाद आरोपित की वहां मौजूद लोगों ने पिटाई की थी। इसमें चोट लगने से उसे भी जिला अस्पताल में सोमवार को भर्ती करना पडा था। सोमवार को वह तनाव में दिखा। मंगलवार को जब सामान्य स्थिति हुई तो पुलिस ने अपनी जांच एकदम से बढा दी। जांच में ही पंखे के नीचे सोने की बात का जिक्र आया है। आरोपित को गिरफ्तार करते हुए मंगलवार को न्यायालय में पेश किया गया।

पुलिस सहायता केंद्र पास में, लेकिन सहायता नहीं

बस स्टैंड पर आए दिन असामाजिक तत्व हंगामा करते रहते हैं। इस घटना में भी यही हुआ। पुलिस ने कोई ध्यान नहीं दिया। डेढ घंटे तक आरोपित ने उत्पात मचाया था। आचार संहिता लागू होने के बाद भी फालिया लेकर वह घुम रहा था। इसके बावजूद रात्रि गश्त करने वाले पुलिसकर्मी उसे नहीं देख पाए। दिन में भी यहां आराजकता का वातावरण अक्सर देखा जाता है। बस स्टैंड से लगभग 200 मीटर की दूरी पर पुलिस सहायता केंद्र बना हुआ है। केवल नाम के लिए यह सहायता केंद्र है। यहां से सहायता किसी को भी नहीं मिल पाती।

सोने की बात को लेकर हुआ विवाद

थाना प्रभारी नरेंद्र रघुवंशी का कहना है कि जांच में नया खुलासा हुआ है। सामान्य होने के बाद आरोपित से भी पूछताछ की है। मामला सामने अब यह आया है कि पंखे के नीचे सोने को लेकर विवाद हुआ था। फालिया आरोपित के पास पहले से ही रखा हुआ था। विवाद में ही यह हत्या हो गई। पुलिस बस स्टैंड पर आने वाले हर संदिग्ध की जांच करती है।

बोरकर के बाद किसी की नजर नहीं

पांच वर्ष पूर्व तत्कालीन कलेक्टर चंद्रशेखर बोरकर ने बस स्टैंड की व्यवस्था को सुधारा था। वहां का सारा सिस्टम ही बदल डाला था। अतिक्रमण करने वाले हाथ ठेला व्यापारियों को हटवाने के साथ ही बस एजेंटों पर लगाम लगाई थी। बसों को व्यवस्थित खड़ा करवाया जाता था। बोरकर के जाने के बाद किसी भी प्रशासन ने यहां नजर नहीं रखी।

इस तरह की होती है घटनाएं

- जेब कतरे बस स्टैंड पर दिनदहाड़े अपना कमाल दिखाते हैं। कोई उन्हें नियंत्रण में नहीं करता।

- बस एजेंट आपस में झगड़ते रहते हैं।

- वहां तैनात पुलिसकर्मी भी एजेंटों के साथ मिली भगत करने में पीछे नहीं।

- बस चालक-परिचालक भी आपस में मारपीट करते रहते हैं।

- यात्रियों के साथ अभद्र व्यवहार होना यहां सामान्य-सी घटना हो गई है।

फैक्ट फाइल

- 225 वाहन बस स्टैंड से प्रतिदिन आते-जाते हैं

- 5 हजार सवारी प्रतिदिन करती है यात्रा

- 30 यात्री जीपें भी बस स्टैंड पर कब्जा कर लेती है

- 40 हाथ ठेला व्यापारी अतिक्रमण नहीं छोड रहे

- 60 के लगभग ऑटो आते-जाते रहते हैं

21 जेएचए 11- झाबुआ में बस स्टैंड के पास ही पुलिस सहायता केंद्र है, लेकिन सहायता किसी ने नहीं की।