जांच में पाया गया रणछोर धाम मंदिर पर महंत का अवैध कब्जा

अवैध कब्जा में सहयोग करने वाले तत्कालीन उपजिलाधिकारी पाली व डीएफओ पर कार्यवाही के लिए शासन को लिखा पत्र

ललितपुर। ललितपुर के धोर्रा धोजरी ग्राम पंचायत में स्थित विश्व प्रसिद्घ रणछोर धाम मंदिर पर महंत व उनके पुत्र द्वारा अवैध कब्जा कराये जाने की जांच जिलाधिकारी द्वारा अपर जिलाधिकारी से करायी गयी थी, जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपते हुए बताया कि तत्कालीन उपजिलाधिकारी पाली व डीएफओ की मिली भगत के चलते महंत को उस पर कब्जा कराया गया है व वन विभाग की जमीन न बताते हुए ग्राम सभा की जमीन बताई गई है, जबकि हकीकत यह है कि जहां पर कब्जा किया गया है वह वन विभाग की भूमि है। इस मामले में जिलाधिकारी ने महंत व उनके पुत्र को अवैध रूप से काबिज पाते हुए कब्जा हटाये जाने के निर्देश दिए, तो वही तत्कालीन उपजिलाधिकारी पाली व डीएफओ के विरूद्घ कार्यवाही के लिए शासन को लिखा गया वहीं रणछोर धाम पर नई समिति बनाए जाने के निर्देश दिए गए।

शनिवार को जिलाधिकारी मानवेन्द्र सिंह ने बड़ी कार्यवाही करते हुए रणछोर धाम मंदिर भूमि पर अवैध कब्जा करने में संलिप्त पाए गए तत्कालीन उपजिलाधिकारी तथा डीएफओ के खिलाफ विभागीय कार्यवाही तथा कब्जा हटाने के लिए पुलिस कार्यवाही एवं श्री रणछोर धाम मंदिर के प्रबन्धन के लिए सरकारी समिति के गठन के आदेश दिए है। जिलाधिकारी ने रणछोर धाम मंदिर सम्बन्धी विवाद की जांच के लिए अपर जिलाधिकारी योगेन्द्र बहादुर को जांच अधिकारी नियुक्त कर जांच आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। अपर जिलाधिकारी ने अपनी जांच में पाया कि वीरेन्द्रानन्द उर्फ रम्मू दुबे एवं चन्द्रशेखर पुत्र वीरेन्द्रानन्द रणछोर धाम मंदिर पर अवैध रूप से काबिज है। जांच समिति द्वारा जांच के समय सभ्रान्त नागरिकों की उपस्थिति में पैमाइश की गयी। पैमाइश में यह पाया गया कि श्री रणछोर धाम मंदिर पर उसके आसपास की विभिन्न संरचना, चारागाह में न स्थित होकर वन विभाग की भूमि में स्थित है। तत्कालीन उपजिलाधिकारी पाली नरेन्द्र सिंह ने बिना किसी पैमाइश के गलत आख्या प्रस्तुत करते हुए वीरेन्द्रानन्द एवं उनके पुत्र को रणछोर धाम मंदिर पर काबिज होने में सहायता की है। जिलाधिकारी मानवेन्द्र सिंह ने अपर जिलाधिकारी की आख्या से सहमति जताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही के आदेश दिए।

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जिलाधिकारी ने किया स्पष्ट रणछोर धाम मंदिर की विवादित भूमि वन विभाग की

जिलाधिकारी ने अपने आदेश में कहा कि स्पष्ट है कि विवादित भूमि वन विभाग की है। यह पूर्व से ही स्थापित था कि प्रश्नगत भूमि वन विभाग की है।

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उपजिलाधिकारी ने वन विभाग की भूमि को बताया चारागाह की भूमि, वन विभाग ने नहीं की आपत्ति दर्ज

निवर्तमान उपजिलाधिकारी पाली नरेन्द्र सिंह ने अपनी आख्या में गलत तथ्य प्रस्तुत किया कि विवादित भूमि चारागाह की है। यह आश्चर्यजनक है कि वन विभाग के अधिकारियों द्वारा उपजिलाधिकारी के निर्णय पर कोई आपत्ति नहीं जतायी गयी। वन विभाग द्वारा बगैर किसी प्रतिकार के मा. उच्च न्यायालय में शपथ पत्र दाखिल किया कि विवादित भूमि वन विभाग की न होकर राजस्व विभाग की है। जिस पर मा. उच्च न्यायालय द्वारा डीएफओ के विरूद्घ पोषित कन्टेमट प्रोसीडिंग को डिस्पोज्ड कर दिया। एडीएम की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि निवर्तमान उपजिलाधिकारी नरेन्द्र सिंह द्वारा गलत तथ्यों तथा बगैर पैमाइश के विवादित भूमि के चारागाह की भूमि बताकर भूमि पर अवैध अतिक्रमणी वीरेन्द्रानन्द को लाभ पहुंचाया गया है। वीरेन्द्रानन्द एक विवादित व्यक्ति है तथा उसके खिलाफ जालौन में विभिन्न आपराधिक मुकदमे दर्ज है। इस प्रकार वीरेन्द्रानन्द ने मा. उच्च न्यायालय में झूठा एवं कूटरचित शपथ पत्र प्रस्तुत किया है यह कृत्य आपराधिक श्रेणी में आता है। वीरेन्द्रानन्द के इस कृत्य में डीएफओ ईश्वर दयाल एवं निवर्तमान उपजिलाधिकारी नरेन्द्र सिंह की संलिप्तता पायी गयी है। इसी क्रम में बगैर किसी पैमाइश के नरेन्द्र सिंह निवर्तमान उपजिलाधिकारी पाली द्वारा दस्तावेजों में पूर्व से वन विभाग मे ंदर्ज भूमि को कूटरचित तरीके से चारागाह की भूमि बताया। इसके लिए नरेन्द्र सिंह निवर्तमान उपजिलाधिकारी पाली के खिलाफ विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ कर शासन को पत्र लिखे जाने के आदेश जिलाधिकारी ने दिए।

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उपजिलाधिकारी नरेन्द्र सिंह की रिपोर्ट पर डीएफओ ने झूठे तथ्य किए न्यायालय में पेश

अपर जिलाधिकारी योगेन्द्र बहादुर सिंह ने जांच में पाया और जिलाधिकारी को सौंपी रिपोर्ट में बताया कि तत्कालीन उपजिलाधिकारी पाली नरेन्द्र सिंह की आख्या पर बगैर किसी प्रतिकार के मा. उच्च न्यायालय में दोषपूर्ण एवं झूठे तथ्यों के डीएफओ ईश्वर चरण ने पेश किया, जिसके चलते डीएफओ के खिलाफ विभागीय कार्यवाही के लिए शासन को पत्र लिखने के आदेश दिए।

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हटाया जाएगा मंदिर से कब्जा

जिलाधिकारी ने पाया कि वीरेन्द्रानन्द अवैध रूप से मंदिर परिसर में काबिज है। जिलाधिकारी ने पुलिस कार्यवाही के माध्यम से मंदिर परिसर पर अवैध कब्जे को हटाने के आदेश जारी किए।

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मंदिर प्रबंधन के लिए गठित होगी समिति, जिलाधिकारी होगें पदेन अध्यक्ष

जिलाधिकारी मानवेन्द्र सिंह ने रणछोर धाम की पौराणिक एवं ऐतिहासिक महत्वता को देखते हुए इसके प्रबन्धन के लिए एक समिति गठित करने के निर्देश दिए है। जिलाधिकारी इस समिति के पदेन अध्यक्ष तथा उपजिलाधिकारी पाली इस समिति के सचिव होगें। समिति के अन्य सदस्यों में तहसीलदार पाली, ग्राम प्रधान, उप प्रधान, पंचायत समिति की तीन चयनित सदस्य, ग्राम पंचायत चुनाव में दूसरे नम्बर पर रहने वाला व्यक्ति बीडीसी, सदस्य जिला पंचायत। इस समिति का गठन डीजीसी की मदद से एक माह के अंदर गठन किया जाएगा तथा इसका रजिस्ट्रेशन सेसायटी रजि. एक्ट के तहत डिप्टी रजिस्ट्रार चिट्स फण्ड कार्यालय में किया जाएगा।