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    उदासीन अखाड़ा ने किया खटलापुरा मंदिर निर्माण, सुरक्षा के लिए बनवाया पहलवानों का अखड़ा (फोटो)

    Published: Thu, 15 Mar 2018 04:11 AM (IST) | Updated: Thu, 15 Mar 2018 04:11 AM (IST)
    By: Editorial Team

    - सन्‌ 1840 में अयोध्या के साधुओं ने की थी स्थापना, मन मोह लेती है तालाब किनारे बने मंदिर की खूबसूरती

    - नवरात्र, रामनवमी व हनुमान जयंती पर लगता है भक्तों का तांता

    भोपाल। नवदुनिया प्रतिनिधि

    राजधानी के कई दिव्य व प्रसिद्ध मंदिर लोगों की अटूट आस्था के केन्द्र हैं। इन सिद्ध स्थानों के साथ ही खटलापुरा मंदिर भी किसी पहचान का मोहताज नहीं हैं। तालाब किनारे लोगों का मन मोह लेने वाला यह खूबसूरत मंदिर अपने अंदर कई इतिहासों को सहेजे हुए है। जो लोगों की अटूट आस्था का केन्द्र है। नवरात्र के दिनों में इस मंदिर विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। नवरात्र में सप्तमी, अष्टमी और नवमी में विशेष पूजा अर्चना व अनुष्ठान किए जाते हैं। जिसमें भक्तों की खासी भीड़ रहती है। महिलाओं द्वारा मां शीतला पर पूड़ी चढ़ाकर पूजा-अर्चना की जाती है और मन्नात मांगी जाती है।

    वहीं हनुमानजी के लिए ख्याती प्राप्त इस मंदिर में हनुमान जयंती पर भक्तों की ऐसी भीड़ी होती है कि वे मंदिर में समा नहीं पाते हैं। राम नवमी पर भी यहां विशेष पूजा-पाठ व महाआरती की जाती है।

    खटलापुरा मंदिर के पुजारी उदासीन बाबा प्रेमदास ने बताया कि मंदिर की स्थापना अब से 178 साल पहले सन्‌ 1840 में अयोध्या के साधू-संतों द्वारा की गई थी।

    जिसके बाद सन्‌ 1969 में उदासी पंचायती बड़ा अखाड़ा ने खटलापुरा मंदिर का निर्माण किया। डॉ. हरीदास मिश्रा द्वारा मंदिर का एक बार फिर जीर्णोद्धार पूर्व में करवाया गया।

    बाबा प्रेमदास ने बताया कि उन दिनों में माहौल कुछ ठीक नहीं था, ऐसे में असामाजिक तत्वों से सुरक्षित करने के लिए मंदिर में पहलवानों का अखड़ा भी बनाया गया था। यह बजरंग व्यायाम शाला आज भी संचालित होती है। हालांकि अब सुविधाओं के आभाव में बहुत कम लोग इस अखाड़े में व्यायाम करने आते हैं।

    सबसे पहले यहां हनुमान जी की स्थापना की गई थी फिर लोगों की आस्था के साथ ही मंदिर का विस्तार भी होता चला गया। आज मंदिर में शीतला माता, मां दुर्गा के साथ ही शिवपिंडी, राम-लक्ष्‌मण, माता जानकी, श्री गणेश, साईं बाबा का दरबार भी है। जिसमें भक्तों की अटूट आस्था है।

    - पितृपक्ष में पिंडदान करने लगती है लोगों की भीड़

    मंदिर के पिछले हिस्से में तालाब किनारे घाट भी बना हुआ है। जहां पितृपक्ष के दिनों में लोगों की खासी भीड़ लगी रहती है। यहां विधि-विधान से पितृपक्ष के विधि-विधान से पिंड दान किया जाता है। साथ ही लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण करते हैं।

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