भोपाल (स्टेट ब्यूरो)। किसान आंदोलन के दौरान छह जून 2017 को मंदसौर में हुए गोलीकांड की न्यायिक जांच रिपोर्ट जस्टिस जेके जैन आयोग ने सरकार को सौंप दी है। दो दिन पहले सामान्य प्रशासन विभाग ने रिपोर्ट आगे की कार्रवाई के लिए गृह विभाग को भेज दी है। बताया जा रहा है कि रिपोर्ट में पुलिस बल द्वारा गोली चलाए जाने की बात कबूली गई है और उन परिस्थितियों का उल्लेख किया गया है, जिसकी वजह से गोली चालन के हालात पैदा हुए। इस रिपोर्ट के विानसभा के मानसून सत्र में प्रस्तुत होने की संभावना बेहद कम जताई जा रही है।

मंदसौर गोलीकांड में 5 किसानों की मौत हुई थी जबकि एक ने बाद में दम तोड़ दिया था। इसकी जांच के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जस्टिस जेके जैन आयोग का गठन कर तीन माह में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे पर आयोग का कार्यकाल बढ़ता रहा। बीती 11 मई को आयोग का बढ़ा हुआ कार्यकाल भी समाप्त हो गया पर रिपोर्ट शासन को नहीं मिली। सूत्रों का कहना है कि कुछ दिनों पहले मुख्य सचिव को रिपोर्ट सौंपी गई। मुख्य सचिव कार्यालय ने इसे सामान्य प्रशासन विभाग को दिया और उसने अब गृह विभाग को भेज दिया है।

मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट का अभी परीक्षण होगा। इसके बाद गृह विभाग इसे कैबिनेट में प्रस्तुत करेगा। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद ही इसे विधानसभा के पटल पर रखा जा सकेगा। 25 जून से शुरू हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र में इसके पटल पर रखे जाने की संभावना कम जताई जा रही है, क्योंकि भोपाल केंद्रीय जेल ब्रेक मामले की रिपोर्ट काफी समय पहले मिलने के बाद भी उस पर अभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस रिपोर्ट को संभवत: मानसून सत्र में टेबल किया जा सकता है।

बंदूक छीनने की कोशिश कर रहे थे किसान

सूत्रों के मुताबिक आयोग के सामने पुलिसकर्मियों ने माना है कि गोली उनकी बंदूक से ही चली है। परिस्थितियां ऐसी पैदा हो गई थीं कि कोई और रास्ता नहीं बचा था। आंदोलनकारी बंदूक छीनने की कोशिश कर रहे थे। इससे बड़ी घटना की आशंका पैदा हो गई थी, इसलिए मजबूरन गोली चलानी पड़ी।

पेंशन घोटाले की रिपोर्ट पर संशय

उधर, पेंशन घोटाले की जांच रिपोर्ट को विधानसभा के पटल पर रखे जाने को लेकर भी संशय की स्थिति है। जस्टिस एके जैन ने इसकी जांच की थी। करीब एक हजार पेज की चार वॉल्यूम में रिपोर्ट उन्होंने मुख्यमंत्री को सौंपी थी। विधानसभा में जब कांग्रेस के रामनिवास रावत ने इसको लेकर सवाल किए तो सामाजिक न्याय मंत्री गोपाल भार्गव ने बताया कि रिपोर्ट सामान्य प्रशासन विभाग को सौंपी गई है। उधर, सामान्य प्रशासन विभाग का कहना है कि इस पर कार्रवाई सामाजिक न्याय विभाग को करना है।