-वास्तविक मुद्दा भाषण की स्वतंत्रता नहीं है बल्कि भाषण दिए जाने के बाद दी गई सुरक्षा है

-एनएलआईयू में इंडिया फाउंडेशन कॉस्टीटूशनल लॉ सिम्पोजियम का समापन

भोपाल। नवदुनिया रिपोर्टर

नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी (एनएलआईयू) की ओर से रविवार को इंडिया फाउंडेशन कॉस्टीटूशनल लॉ सिम्पोजियम के प्रथम संस्करण का समापन हो गया। समारोह में विश्वास और भारतीय संविधान नामक विषय पर एक पैनल चर्चा की गई। इस मौके पर सेडिशनः द विक्टोरियन एरा तानाशाह नामक पेपर प्रस्तुति दी गई। जिसमें सरकार के खिलाफ आलोचना और राष्ट्र विरोधी लोगों की ब्रांडिंग के लिए राजद्रोह कानून के उपयोग की जांच केंद्र में थी। संगोष्ठी में पूर्व न्यायाधीश, भारतीय सर्वोच्च न्यायालय और अध्यक्ष कानूनी शिक्षा समिति न्यायमूर्ति एपी मिश्र, नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया के पूर्व निदेशक प्रोफेसर एन. मित्रा, एडमस विवि के डीन प्रो डॉ. बीएन. पांडे, एनएलआईयू के कुलपति डॉ. वी विजयकुमार, आईएलआई दिल्ली के निदेशक डॉ. मनोज सिन्हा और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता जे सईं दीपक शामिल हुए।

धन से अधिक नैतिकता को महत्व

न्यायमूर्ति मिश्रा ने एक दस्तावेज के एक से अधिक दर्शन होने के नाते भारतीय संविधान पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने छात्रों के लिए धन से अधिक नैतिकता को महत्व देने का आग्रह किया। साथ ही समाज के मुख्य दायित्वों को अधिकारों तक स्थानांतरित करने पर जोर दिया। वक्ताओं ने ऐतिहासिक निर्णय, ऐतिहासिक घटनाओं और कानून के प्रासंगिक सिद्घांतों की जानकारी दी।

मुझे विश्वास में बहुत कम विश्वास

कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने विश्वास और भारतीय संविधान पर पैनल चर्चा की। उन्होंने कहा कि कानून हमेशा लोगों से आया है और उसकी व्याख्या हमेशा लोगों के भीतर की जानी चाहिए। इस प्रकार विश्वास, समाज और कानून काफी हद तक अविभाज्य हैं। प्रो. वीके दीक्षित ने कहा कि मुझे विश्वास में बहुत कम विश्वास है,लेकिन भारतीय संविधान में जबरदस्त विश्वास है।

न्यूजीलैंड में आतंकवादी हमला बड़ा अपराध

अंतिम पैनल चर्चा फ्रीडम ऑफ स्पीच एंड एक्सप्रेशन इन द एज ऑफ सोशल मीडिया शीर्षक से हुई। जिसमें डॉ. पी पुनीथ ने सोशल मीडिया के युग में भाषण और अभिव्यक्ति के नियमन से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों को साझा किया। उन्होंने कहा कि हाथ में वास्तविक मुद्दा भाषण की स्वतंत्रता नहीं है,बल्कि भाषण दिए जाने के बाद दी गई सुरक्षा है। अनुराधा शंकर ने न्यूजीलैंड में हुए आतंकवादी हमले का हवाला देकर मुद्दे की प्रासंगिकता को सामने लाने का प्रयास किया। उन्होंने ट्वीटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम, यूट्यूब पर लाइव स्ट्रीमिंग करते हुए निर्दोष लोगों को मारना बड़ा अपराध बताया।