कटनी। नईदुनिया प्रतिनिधि

दिवाली के दौरान पटाखे नहीं जलाएं, इससे प्रदूषण फैलता है। हवा में प्रदूषण का जहर घुलता है जिससे लोग बीमार हो सकते हैं। इस तरह की बातें दिवाली आने के पहले से सोशल मीडिया पर की जा रही थी, लेकिन जब दिवाली आई तो सभी बातें सिर्फ बातें ही रह गई। दिवाली की शाम से जमकर पटाखे जलाए गए। पटाखों के जलने से निकलने वाले धुएं का गुबार आसमान में बन गया। दिवाली की रात सामान्य दिनों की अपेक्षा 15 फीसदी प्रदूषण निर्धारित मात्रा से बढ़ गया। आम दिनों में शहर की प्रदूषण की स्तर 100 माइक्रोग्राम रहता था लेकिन दिवाली की रात 115 माइक्रोग्राम पहुंच गया।

देर रात तक जलाए गए पटाखे

दिवाली की शाम से पटाखों को जलाए जाने का सिलसिला शुरू हो गया था। रात होते-होते दिवाली की उत्साह चरम पर था और पटाखा जलाने की पराकाष्ठा पार कर दी गई। लाखों रुपए के पटाखे जलाए गए। अधिक मात्रा में पटाखे जलाए जाने से न सिर्फ प्रदूषण का स्तर पर बढ़ गया, बल्कि ध्वनि प्रदूषण का स्तर भी 100 से बढ़कर 102 हो गया था। हालांकि ध्वनि प्रदूषण का अधिकतम स्तर पर 125 निर्धारित किया गया है लेकिन 23 फीसदी ध्वनि प्रदूषण कम ही हुआ है।

हवा में घुली धूल से बढ़ा प्रदूषण

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुख्य रासायनिक अधिकारी डॉ एसपी बद्घोलिया ने बताया कि दीपावली की शाम को हवा में धूल के कण घुल गए थे। इसके कारण प्रदूषण का स्तर 100 माइक्रोग्राम से बढ़कर लगभग 115 माइक्रोग्राम हो गया था। जबकि पीएम 2.5 अधिक पाया गया है। उन्होंने बताया कि पटाखा जलाने की वजह से हवा में धूल के कण घुलने से प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है। पूरे शहर में यही स्थिति है। जबकि ग्रामीण क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर सामान्य ही बना रहा।

बढ़ सकती अस्थमा की परेशानी

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुख्य रासायनिक अधिकारी डॉ एसपी बद्घोलिया ने बताया कि प्रदूषण बढ़ने से मुख्य रूप से अस्थमा से पीड़ित मरीजों को परेशानी होती है। ऐसी स्थिति में अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में परेशानी होने लगती है। इसके अलावा प्रदूषण बढ़ने से अस्थमा की बीमारी से पीड़ित होने की आशंका अधिक रहती है। उन्होंने बताया कि दिवाली की शाम को धूल के कण निर्धारित मात्रा से अधिक पाई गई है। सीमा रेखा 100 माइक्रो ग्राम से अधिक पाई गई। हवा में प्रदूषण का स्तर करीब 115 माइक्रोग्राम रहा। उन्होंने बताया कि पटाखों की वजह से धूल की मात्रा वायुमंडल बढ़ गई है। पटाखों की ध्वनि का निर्धारित मापदंड 125 अधिकतम था। सामान्य स्थिति 100 पर रहती है। दो फीसदी ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ा है। उन्होंने बताया कि दिवाली के दिन देर रात हुई अतिशबाजी से प्रदूषण का स्तर कितना बढ़ा है उसकी जानकारी शुक्रवार दोपहर तक मिल सकेगी। जांच के लिए मशीनें लगाई गई हैं।

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पटाखे जलाने से हवा में धूल घुल गई है जिसके कारण प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है। प्रदूषण बढ़ने से अस्थमा के मरीजों को परेशानी होती है। बढ़े हुए प्रदूषण की जांच गुरूवार को की गई है। शुक्रवार को उसकी रिपोर्ट भी आ जाएगी।

-डॉ एसपी बद्घोलिया, मुख्य रासायनिक अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।