अक्षय तृतीया के अवसर पर जिले में कहीं भी बाल विवाह नहीं होने दिया जाएगा। बाल विवाह को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने टीम गठित की है साथ ही बाल विवाह होने की जानकारी देने के लिए कंट्रोल रूम बनाकर उसके नंबर भी सार्वजनिक किए गए हैं, ताकि कहीं पर भी बाल विवाह हो तो उसकी सूचना दी जा सके। अक्षय तृतीया पर आरोजित किए जाने वाले सामूहिक विवाह समारोह में बाल विवाह रोकने के लिए महिला बाल विकास विभाग ने जिला कलेक्टर को निर्देश जारी किए हैं। जिसमें कहा गया है कि गांवों में लोगों को बाल विवाह नहीं कराने का परामर्श देने के साथ-साथ बाल विवाह होने की सूचना प्राप्त होने पर स्थानीय अधिकारियों द्वारा तत्काल कार्रवाई करने, पुलिस प्रशासन और स्वयं सेवी संस्थाओं को सक्रिय रहने के लिए निर्देश दिए गए हैं।

दर्ज किया जाएगा मामला : लाडो अभियान के तहत लोगों को व्यापक स्तर बाल विवाह नहीं करने के लिए जागरुक किया जा रहा है। बाल विवाह रोकथाम अधिनियम 2006 की धाराओं की भी जानकारी दी जा रही है। जिसमें बताया जा रहा है अधिनियम के अन्तर्गत बाल विवाह कराने व उसमें सहयोग देने वालों के लिए दो वर्ष का कारावास या एक लाख रुपए का जुर्माना या फिर दोनों का प्रावधान है।

विवाह प्रक्रिया से जुड़े सभी लोगों जिनमें हलवाई, केटरर, धर्मगुरू, बेंड वाले, घोड़ी वाले, ट्रांसपोर्टरों से भी कहा गया है कि वे कहीं पर भी बाल विवाह होता देखा तो उसकी सूचना दें। ताकि बाल विवाह को रोका जा सके। साथ ही उनसे कहा गया कि आयु संबंधी प्रमाण-पत्र का परीक्षण करने के बाद ही अपनी सेवाएं दें। नहीं तो उनके खिलाफ भी बाल विवाह में सहयोग करने पर कार्रवाई की जाएगी। विवाह के आमंत्रण कार्ड में वर-वधु के आयु संबंधी प्रमाण का परीक्षण करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। निर्देश में यह भी बताया गया है कि लाडो अभियान के लिए इस वर्ष की थीम बाल विवाह की रोकथाम और बधाों का कौशल विकास होगी। बाल विवाह की रोकथाम के लिए वातावरण निर्मित करने में जन-प्रतिनिधियों, पंचायत प्रतिनिधियों और ग्राम स्तर तक कार्यरत शासकीय सेवकों का भी सहयोग लिया जा रहा है।