Naidunia
    Thursday, April 26, 2018
    PreviousNext

    जीवन में दो चीज जरूरी होती हैं प्राण व अस्तित्व नेत्र ज्योति व उसकी सेवा सबसे बड़ा परमार्थ

    Published: Wed, 18 Apr 2018 01:17 AM (IST) | Updated: Wed, 18 Apr 2018 01:17 AM (IST)
    By: Editorial Team

    जीवन में दो चीज जरूरी होती है। हमारे प्राण और अस्तित्व। प्राण यानी श्वांस जिसका संपर्क बाह्‌य जगत ये होता और यदि अस्तित्व के स्तर पर देखे तो जितना भी और अनुभूत हमें आंखे के माध्यम से प्राप्त होती है इसके अलावा कोई भी इन्द्री प्रभावशील नहीं है जो हमें बाहरी जगत से जोड़कर रखे, नेत्र ज्योति और उसकी सेवा सबसे बड़ा परमार्थ है। ये बातें प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी ईश्वरी विश्वविद्यालय राजयोग केन्द्र सिविल लाइन में आयोजित दो दिवसीय निःशुल्क नेत्र परामर्श शिविर के दौरान मुख्य अतिथि पुलिस अधीक्षक अतुल सिंह ने व्यक्त किए।

    आंखों से संबंधित रोगों

    में न बरतें लापरवाही

    कार्यक्रम के संयोजक किशनलाल टहलरामानी, राजयोग केन्द्र प्रभारी बीके लक्ष्मी बहन, ऑल इंडिया एडवोकेट फोरम के चैयरमैन रमाकांत निगम सहित बंसल हास्पिटल भोपाल से आए नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ विनिता रामनानी की विशेष उपस्थिति में अतिथियों द्वारा कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन कर किया गया। डॉ विनिता रामनानी द्वारा मरीजों का आधुनिक मशीनों के माध्यम से निःशुल्क जांच कर उन्हें परामर्श देते हुए आंखों से संबंधित रोगों में लापरवाही नहीं बरतने की हिदायत दी गई। शिविर में काफी संख्या में जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क दवाईयां राजयोग केन्द्र द्वारा प्रदान किए गए। राजयोग केन्द्र संचालिका बीके लक्ष्मी बहन ने अतिथियों का सम्मान किया॥ नेत्र शिविर का संचालन एडवोकेट साहित्यकार रमाकांत निगम ने किया।

    ये रहे उपस्थित

    शिविर के प्रथम दिवस सरकारी अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ यशवंत वर्मा, आयकर विभाग के पूर्व अतिरिक्त कमिश्नर इश्तियाक हुसैन, समरिटन सोशल सोसायटी सतना के जितेन्द्र शुक्ला, घनश्याम पाण्डेय, विभव मिश्रा, अभिषेक त्रिपाठी, सूर्यप्रताप दिनकर, संदीप सतनामी आदि मौजूद रहे।

    और जानें :  # katni # news
    प्रतिक्रिया दें
    English Hindi Characters remaining


    या निम्न जानकारी पूर्ण करें
    नाम*
    ईमेल*
    Word Verification:*
    Please answer this simple math question.
    +=

      जरूर पढ़ें