रजनीश बाजपेई, कटनी। लोग कहते हैं कि नाम में क्या रखा है, लेकिन कटनी के इस गांव के लोगों से पूछिए वह बताएंगे कि इसमें क्या रखा है। किसी को गांव का नाम बताते समय वे कई बार सोचते थे। गांव का नाम ही ऐसा था दुर्जनपुर। कई पंचायतें आईं और चली गईं, लेकिन किसी ने गांव वालों की इस भावना को नहीं समझा। फिर एक महिला सरपंच बनी हेमलता सोनी। उन्होंने और उनके पति अरुण सोनी ने इस विषय में गंभीरता दिखाई। इसके बाद शुरू हो गया गांव के नाम को बदले जाने का सफर। इस संबंध में पहली कागजी कार्रवाई 21 जून 2015 को हुई जब गांव की ग्राम सभा ने इस आशय का प्रस्ताव पारित किया।

इसके बाद लिखा-पढ़ी का जो सिलसिला शुरू हुआ वह नाम बदलने तक तक जारी रहा। 22 मार्च 2019 को राजपत्र में नाम शिवधाम प्रकाशित हुआ। तीन वर्ष 9 महीने 1 दिन का यह सफर बड़ा रोचक रहा। कई अवरोध आए, लेकिन सफर थमा नहीं।

दो कलेक्टर बदले गए

20 अक्टूबर 2015 को मामला विजयराघवगढ़ पहुंचा। यहां की अनुसंशा के बाद जिला प्रशासन के पास पहुंचा, लेकिन इस बीच दो कलेक्टर ने कोई रूचि नहीं ली। इसके बाद कलेक्टर विशेष गढ़पाले आए। इन्होंने मामले में विशेष रुचि दिखाते हुए नाम बदलने के ग्राम पंचायत के संकल्प पर तेजी से कार्य किया। उन्होंने 12 फरवरी 2018 को अनुविभागीय अधिकारी से मामले में प्रतिवेदन मंगवाया। शिवधाम ही नाम क्यों रखा गया। इस संबंध में पता चला कि गांव में एक शिव का मंदिर है इसलिए नाम शिवधाम रखा।

नाम बदलने का सफर

अनुविभागीय अधिकारी द्वारा प्रतिवेदन प्रस्तुत किए जाने के बाद कलेक्टर विशेष गढ़पाले ने जिला प्रशासन की तरफ से 5 मार्च 2018 को पत्र लिखा। इसके बाद मप्र शासन की तरफ से 28 जून 2018 इस आशय की स्वीकृति जारी करते हुए मामला भारत सरकार के पास भेजा गया। भारत सरकार के द्वारा 19 फरवरी 2019 से भारत सरकार ने स्वीकृत प्रदान की गई। 22 मार्च को 2019 को राजपत्र में जारी कर दिया गया। 3 अप्रैल 2019 को मामले में रिकार्ड दुरुस्त करने के लिए प्रशासन द्वारा आदेश जारी कर दिए गए।