राघवेन्द्र बाबा, इंदौर। 'कविता रैना" का नाम अब पुलिस अकादमी में भी गूंजेगा। वह कौन सा पाउडर लगाती थी, खाने में क्या पसंद था, बच्चों के कपड़े कहां से खरीदती थी, किस तरह से पढ़ाती थी जैसी हर बात जो कविता से जुड़ी है, पुलिस इन 107 दिन में जान गई। इतना तो शायद उसके परिवार वालों को भी नहीं पता था। इस मर्डर मिस्ट्री को पुलिस ने मध्यप्रदेश में अब तक का सबसे बड़ा और चुनौतीपूर्ण केस माना है। इसका पर्दाफाश करने में पुलिस को क्या-क्या परेशानियां हुईं, कितने लोग लगे, कैसे पड़ताल की गई, इसकी एक पटकथा तैयार की जा रही है। जल्द ही इस केस को पड़ताल का अहम पाठ मानकर पुलिस अकादमी में पढ़ाया जाएगा।

पुलिस ने कविता से जुड़े हर पहलू को जाना था, ताकि इस केस में कोई ढील न रह जाए। एक टीम सिर्फ महिलाओं से ही पूछताछ करती थी, तो दूसरी वेश बदलकर लोगों की दिनचर्या पर नजर रखती थी। ऐसी कई टीमें बनाई गई थी। केस में पुलिस को दिन-ब-दिन नए मोड़ मिले। कभी-कभी तो लगता था कि केस आज सुलझ ही जाएगा, लेकिन लग गए 107 दिन। इस दौरान पुलिस ने क्या-क्या किया कैसे किया, किन-किन लोगों से क्या-क्या पूछताछ की, कितने मोबाइल खंगाले, यह सब पढ़ाया जाएगा।

अब तक की सबसे महंगी पड़ताल

केस में एक एडीजी, एक डीआईजी, दो एसपी, चार एएसपी सहित पांच थानों के 200 लोगों की टीम लगी थी। थानों से ट्रांसफर होकर जा चुके अनुभवियों को भी इसमें उतारा गया था। हाईटेक संसाधन भी थे। इस कारण केस को सुलझाने के लिए काफी खर्च करना पड़ा। हालांकि आकलन नहीं हो सकता है, फिर भी किसी अन्य केस के बजाय इसमें ज्यादा खर्च करना पड़ा। पुलिस ने मुखबिर तंत्र को भी हजारों की शराब पिलाई। क्राइम ब्रांच ने छह पब्लिक स्विच्ड टेलीफोन नेटवर्क (पीएसटीएन) के जरिये डेढ़ लाख से ज्यादा मोबाइल डिटेल खंगाली।

गूगल से मकान-गोदाम की सर्चिंग

भंवरकुआं टीआई राजेंद्र सोनी ने तीन इमली चौराहा (जहां कविता की लाश मिली थी) से लेकर नेमावर रोड (6 किमी के दायरे में) के सारे मकान और गोदाम छाने। टीआई गूगल पर एक-एक मकान को टिक करते तो फील्ड पर टीम जांचती। कहीं बदबू मिलती या खून मिलता तो उसे सघन तौर से जांचा जाता। 1500 से ज्यादा मकान और 200 से ज्यादा गोदाम खंगाले गए। इलाके की 117 बुलेट और 150 से ज्यादा कारें भी जांची गई।

फिल्म भी देखी

अफसरों ने अजय देवगन की हालिया रिलीज फिल्म 'दृश्यम" भी देखी। पुलिस को शंका थी कि पति झूठ बोल रहा है। हालांकि ऐसा नहीं निकला। पुलिस ने 107 दिन में 20 से ज्यादा बार मर्डर की ट्रायल की।

इसे उपलब्धि माना

यह प्रदेश का सबसे चुनौतीभरा केस था, जिसमें सबसे ज्यादा संसाधन और इन्वेस्टीगेशन हुए। अब इस केस को एकेडमी में पढ़ाया जाएगा, ताकि हमारे अफसर और नवागत पुलिसकर्मी पड़ताल और पूछताछ के तरीके जान सकें।

डी. कल्याण चक्रवर्ती, एसपी पश्चिम

एक नजर

- 107 दिन

- 200 की टीम

- 177 से पूछताछ

- 6 पीएसटीएन

- 1.5 लाख मोबाइल रिकॉर्ड

- 1500 से ज्यादा मकान और 200 से ज्यादा गोदाम खंगाले

- 20-20 घंटे काम

- 20 से ज्यादा बार मर्डर ट्रायल

- 117 बुलेट और 150 से ज्यादा कारों को जांचा

- 100 से ज्यादा संस्थानों के कैमरे जांचे

- पांच थानों की पुलिस (कनाड़िया, क्राइम ब्रांच, पलासिया, भंवरकुआं और वी केयर फॉर यू)