खंडवा, नईदुनिया प्रतिनिधि। कहने को तो मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इंदिरा सागर बांध परियोजना में विस्थापित हुए हरसूद शहर को गोद लेने की घोषणा कर दी लेकिन इसके बाद भी यहां के बाशिंदों को आसानी से रोजगार मिल जाएगा, इसमें संशय है। बैतूल संसदीय क्षेत्र में शामिल खंडवा जिले के हरसूद विधानसभा क्षेत्र में लोकसभा की जीत के लिए भाजपा-कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। यह अलग बात है कि इसी विधानसभा में शामिल खालवा के सैकड़ों गांवों में कुपोषण का दर्द कम नहीं हो रहा है। पिछले चुनावों में भी हरसूद का विकास किए जाने के वादे नेता करते रहे लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। वादों से ऊब चुके यहां के रहवासी मानने लगे हैं कि चुनाव में जीत-हार किसी की भी हो लेकिन हरसूद के लोग समस्याओं से तो हर हाल में हारते रहे हैं। निकट भविष्य में भी यहां विकास गाथा लिखे जाने की कोई बड़ी उम्मीद नजर नहीं आती है। हरसूद में 6 मई को चुनाव होना है।

लगभग एक लाख 97 हजार मतदाताओं वाला हरसूद विधानसभा क्षेत्र पूर्व मंत्री व वर्तमान विधायक विजय शाह का अजेय गढ़ रहा है। हाल ही के विधानसभा चुनाव में उन्होंने लगातार सातवीं बार 18500 वोटों से जीत दर्ज की थी। इसके पहले लोकसभा चुनाव में भाजपा को हरसूद से बड़ी लीड मिली थी। 90 के दशक के बाद से यहां कांग्रेस अपने पैर नहीं जमा पाई। हाल ही में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सभा कर हरसूद को गोद लिया और गुंडागर्दी खत्म करने की चेतावनी दी। इसके बाद से इस क्षेत्र में दोनों ही दल मैदान में उतर आए हैं। मुख्यमंत्री ने लोकसभा प्रभारी मिथुल जोशी को सिर्फ इसी विधानसभा में ज्यादा से ज्यादा समय देने की ताकीद दी तो अपने विश्वस्त खंडवा के कुंदन मालवीय और सोनखेड़ी के अशोक पटेल को भी मैदान में उतारा है।

बूथों को बांटकर काम कर रही कांग्रेस : विजय शाह के बड़े भाई अजय शाह पिछला लोकसभा चुनाव लड़े थे और इस बार उन्हें पार्टी को जिताने की जिम्मेदारी दी गई है। कांग्रेस पहली बार 272 बूथों को न सिर्फ कागजों पर बल्कि मैदानी स्तर पर भी सेक्टर में डिवाइड कर काम कर रही है। हरसूद और खालवा ब्लॉक के बूथों को बांटकर काम किया जा रहा है। हालांकि भाजपा के पास यह रणनीति पहले से तैयार है। बेरोजगारी, पलायन, विस्थापन, कुपोषण, सिंचाई सहित अन्य समस्याओं से मुख्यमंत्री को अवगत करा दिया गया है। हरसूद को गोद लेकर कमलनाथ इन समस्याओं को दूर करने का वादा कर चुके हैं। इसके बावजूद कांग्रेस को कर्जमाफी, समर्थन मूल्य पर उपज खरीदी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। विजय शाह का गढ़ भेदने की चुनौती के साथ ही यहां लीड कम करने के साथ लीड बढ़ाने की भी चुनौती कांग्रेस को है।

रोजगार बड़ी चुनौती

बहरहाल, एक हजार मेगावाट बिजली उत्पादन करने वाली इंदिरा सागर बांध परियोजना में विस्थापित हुए हरसूद के 22 हजार लोगों को 14 साल बाद आज भी रोजगार की तलाश है। जीत भाजपा-कांग्रेस में से किसी एक की होगी लेकिन यहां रोजगार उपलब्ध कराना किसी भी दल के लिए आसान नजर नहीं आता। नेताओं के दावों और वादों के बावजूद इस बार भी पहले की तरह हरसूद का हारना तय माना जा रहा है।