खंडवा, नईदुनिया प्रतिनिधि। रामनगर के पास डेरे में रहने वाले बच्चे भी अब स्कूल जा सकेंगे। उन्हें मंगलवार को रामनगर के स्कू ल में डेरे के 23 बच्चों को प्रवेश दिलाया जाएगा। इसके साथ ही दूसरे जिलों से मजदूरी करने आए लोगों के बच्चों को सरकारी स्कू ल और आंगनवाड़ी में प्रवेश मिलेगा। शिक्षा से वंचित बच्चों की सुध लेने के लिए सोमवार को शिक्षा विभाग के अधिकारी पहुंचे। यहां बच्चों ने विभागीय अधिकारियों से कहा कि सर हम पढ़ना चाहते हैं, आप हमें स्कू ल ले जाएंगे। शिक्षा के अधिकार से वंचित और शिक्षा छोड़ मजदूरी को मजबूर बच्चों के मामले को नईदुनिया ने प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया और अब इन बच्चों को स्कू ल में प्रवेश दिलाने की तैयारी की जा रही है।

रामनगर के पास डेरे में सोमवार दोपहर को जिला शिक्षा कें द्र और जनपद शिक्षा कें द्र के अधिकारियों सहित प्रायमरी स्कू ल का स्टाफ पहुंचा। यहां शिक्षा से वंचित बच्चों की जानकारी ली गई तो 23 बच्चे ऐसे मिले जो स्कू ल नहीं जाते हैं। विभागीय अधिकारियों ने इन बच्चों के नाम रजिस्टर में नोट कि ए और प्रामयरी स्कू ल के स्टाफ को निर्देश दिए कि इन बच्चों का मंगलवार को स्कू ल में प्रवेश कराया जाए। क्षेत्र के शिक्षकों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि शुरुआती दिनों में वे बच्चों को लेने के लिए बस्ती में पहुंचें और इन बच्चों को प्रतिदिन स्कूल लेकर आएं।

इसके बाद अमला इंदौर रोड पर काम कर रहे मजदूरों के पास पहुंचा। इन्हें समझाइश दी कि वे बच्चों से मजदूरी नहीं कराएं। जहां भी मजदूरी कर रहे हों उन्हें पास के स्कू ल और आंगनवाड़ी में भेजें। इस दौरान एपीसी शेख यूनूस, प्रभारी बीआरसी श्रीकृष्ण तावड़ेकर, हेमदत्त डोंगरे, अनुराग जगनवार, जयेश श्रीमाली, रामनगर स्कू ल की शिक्षिका संगीता कुंडले और सेवंती सांवले सहित अन्य मौजूद रहे।

10 से 12 साल के बच्चे भी अप्रवेशित : रामनगर के पास डेरे में बोरगांव, सराय और बुरहानपुर के करीब 20 परिवार रहते हैं। इस डेरे में 23 ऐसे बच्चे हैं जो स्कू ल नहीं जाते। कई बच्चों की आयु तो 10 से 12 साल हो गई हैं लेकि न उनका नाम स्कू ल में दर्ज नहीं है।

परिजनों ने कहा रोज भेजेंगे स्कूल : शिक्षा से वंचित बच्चों को पहले अधिकारियों ने चॉकलेट बांटी फिर उनसे पूछा कि वे स्कू ल चलेंगे तो सभी बच्चों का कहना था कि वे स्कू ल जाना चाहते हैं। परिजनों ने भी कहा कि वे बच्चों को रोज स्कू ल भेजेंगे। अब तक जागरुकता के अभाव में यह बच्चे शिक्षा से वंचित थे।

स्कूल चलें हम अभियान में क्यों नहीं मिले : नईदुनिया द्वारा मामला उठाने के बाद विभागीय अधिकारी इन बच्चों को स्कू ल में प्रवेश दिलाने पहुंचे हैं लेकि न सवाल यह भी है कि जून-जुलाई में चले स्कू ल चलें हम अभियान में इन बच्चों को दर्ज क्यों नहीं कि या गया।

आंगनवाड़ी में बैठ रहे हैं बच्चे : डेरे के कई बच्चे आंगनवाड़ी में बैठ रहे थे। 6 से 10 साल के बच्चों को भी परिजन आंगनवाड़ी भेजे देते थे, वहां इन बच्चों को खाना मिल जाता था। विभागीय अमले ने यहां के लोगों को समझाइश दी कि बच्चों को प्रतिदिन स्कू ल भेजें वहां इन्हें पोष्टिक भोजन दिया जाएगा।

कोई भी करा सकता है प्रवेश

सर्व शिक्षा अभियान के एपीसी शेख यूनूस ने बताया कि स्कू ल में अप्रवेशित बच्चे का वर्ष भर में कभी भी प्रवेश कराया जा सकता है। कि सी भी व्यक्ति को अगर कोई ऐसे बच्चे की जानकारी हो जो शिक्षा से वंचित है तो निकटतम सरकारी स्कू ल को सूचना दे। इसके साथ ही मजदूरी करने के लिए दूसरे जिलों से आए मजदूरों के बच्चों को भी आंगनवाड़ी और स्कू ल भेज सकते हैं। कार्य अवधि के दौरान बच्चे स्कू ल आएं, इसके बाद माता-पिता जहां मजदूरी करने जाएं वहां के निकटतम स्कू ल में बच्चों को भेजें।