खंडवा, नईदुनिया प्रतिनिधि। निजी स्कूलों में नए शिक्षा सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। कई स्कूलों में तो नए सत्र की पढ़ाई भी शुरू कर दी गई है। इसके बावजूद अब तक वंचित वर्ग के बच्चों को इन स्कूलों की आरक्षित सीटों पर प्रवेश नहीं मिल सका है। यहां तक की निजी स्कूलों में गरीब व वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या तक तय नहीं हुई है।

निजी स्कूल भी प्रवेश के दौरान आरटीई की कोई जानकारी अभिभावकों को नहीं दे रहे। ऐसी ही स्थिति के चलते गत वर्ष निजी स्कूलों में आरक्षित 2900 सीट पर प्रवेश नहीं हो सके थे। जिले में 310 निजी स्कूलों में करीब पांच हजार बच्चों को प्रवेश मिलना है लेकिन निजी स्कूलों में सत्र शुरू होने के कारण इस योजना के पात्र कई अभिभावक फीस भरकर बच्चों का प्रवेश कराने को मजबूर हैं।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निजी शालाओं में गरीब व वंचित वर्ग के बच्चों को निशुल्क दाखिला देने का प्रावधान है। निजी शालाओं में प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। इसके बावजूद शिक्षा के अधिकार के तहत प्रवेश प्रक्रिया की तिथि भी अब तक घोषित नहीं हो सकी है। जिले के 310 निजी स्कूलों में आरटीई के तहत पांच हजार से अधिक विद्यार्थियों का प्रवेश होना है। गत वर्ष तक ऐसे ही हालात के चलते जिले में करीब साढ़े तीन हजार सीट खाली रह गई थीं। देरी से प्रक्रिया होने के बाद आरटीई के तहत प्रवेश के लिए एक ही चरण में आवेदन आमंत्रित हुए। ऐसे में कई अभिभावक आवेदन ही नहीं कर सके।

असमंजस में पालक, लगा रहे स्कूलों के चक्कर

आईटीआई के पास मलिन बस्ती में रहने वाले ठेला चालक रमेश कालू अपने तीन साल के बेटे के प्रवेश के लिए आनंद नगर क्षेत्र के निजी स्कूलों में भटक रहे हैं। उनका कहना है कि स्कूल प्रबंधक उन्हें यह कहकर लौटा दे रहे हैं कि आरटीई के लिए अब तक विभाग ने कोई सीट आरक्षित नहीं की है। इसी तरह संजय नगर निवासी ऑटो चालक दिलीप भगोरे ने कहा कि निजी स्कूलों में प्रवेश हो रहे हैं लेकिन आरटीई के एडमिशन नहीं हो रहे। ऐसे में हमें समझ नहीं आ रहा कि बेटे का प्रवेश कैसे होगा। क्या पता ऑनलाइन फॉर्म कब जमा होंगे। ऐसे में फीस जमा कर निजी स्कूल में प्रवेश करा रहा दूंगा।

पिछड़ जाएंगे विद्यार्थी

आरटीई में आवेदन की तिथि निर्धारित होना, ऑनलाइन आवेदन, सत्यापन और लॉटरी की पूरी प्रक्रिया में करीब डेढ़ माह का समय लग जाता है। इस कारण आरक्षित सीटों पर प्रवेश लेने वाले गरीब व वंचित वर्ग के बच्चे शुरुआती पढ़ाई से वंचित रह जाएंगे। सीबीएसई व कुछ निजी स्कूलों में अभी से ही नया शिक्षा सत्र शुरू हो गया है। यहां 20 से 25 अप्रैल तक कक्षाएं लगेंगी।

हर वर्ष लक्ष्य से पिछड़ रहा है विभाग

गत वर्षों में आरटीई के तहत हुई प्रवेश प्रक्रिया पर नजर डालें तो निजी स्कूलों में आरटीई का लक्ष्य पिछड़ता दिखाई देता है। वर्ष 2017-18 में करीब 2900, 2016-17 में 1507, 2015-16 में 822 सीटों पर विद्यार्थियों के प्रवेश नहीं हो सके थे। ऐसे में अगर विभागीय स्तर पर गरीब व वंचित वर्ग के बच्चों को उनका हक दिलाने के लिए सार्थक प्रयास नहीं हुए तो शिक्षा का अधिकार अधिनियम अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाएगा।

जारी करेंगे पत्र

आरटीई के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया के लिए अब तक कोई आदेश नहीं मिला है। अप्रैल माह में प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो सकती है। निजी स्कूलों को पत्र जारी कर निर्देश दिए जाएंगे कि वे आरटीई के दायरे में आने वाले अभिभावकों को प्रक्रिया की जानकारी दें और नोटिस बोर्ड पर आरटीई के तहत आरक्षित सीटों की जानकारी दर्शाएं। किसी भी जानकारी या शिकायत के लिए अभिभावक जनपद शिक्षा केंद्र, जिला शिक्षा केंद्र और शिक्षा अधिकारी कार्यालय में आ सकते हैं। - पीएस सोलंकी, जिला शिक्षा अधिकारी