खंडवा, नईदुनिया प्रतिनिधि। नगर निगम द्वारा शहर के 50 वार्डों में मकानों और अन्य संपत्तियों की पहचान के लिए नंबर प्लेटें लगाई जा रही हैं। पहली बार इन नंबर प्लेटों के माध्यम से आमजन में स्वच्छता के साथ ही समय पर टैक्स अदा करने का संदेश भी दिया जा रहा है। अब तक करीब 10 हजार घरों में इस तरह की नंबर प्लेटें लगाई जा चुकी हैं।

ज्योग्राफिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) सर्वे के मुताबिक शहर में करीब 48 हजार संपत्तियां आंकी गई हैं। इनमें मकानों के अलावा व्यवसायिक प्रतिष्ठान, मिल, कारखाने और धार्मिक स्थल भी शामिल हैं। नगर निगम द्वारा इन सबकी पहचान के लिए विशेष रुप से नंबर प्लेटें बनवाई गई हैं। इन्हें लगाने का काम भी शुरु कर दिया गया है। वार्डवार लगाई जा रही इन नंबर प्लेटों में वार्ड का नंबर और नाम सहित मकान का नंबर ही नहीं बल्कि आमजन में स्वच्छता का संदेश देने के लिए भी स्लोगन लिखा है। स्वच्छ भारत, स्वच्छ खंडवा के संदेश के साथ ही टैक्स समय पर जमा करें की अपील भी अंकि त की गई है। प्रत्येक घर और संपत्ति पर लगाई जा रही नंबर प्लेटों का कोई शुल्क नगर निगम द्वारा नहीं लिया जा रहा है। बताया जाता है कि एल्यूमिनियम से बनी एक नंबर प्लेट पर निगम को करीब 55 रुपए का खर्च आया है।

हाल ही में इसके टेंडर जारी हुए हैं। विदित हो कि करीब 10 साल पहले भी संपत्ति की पहचान के लिए नगर निगम द्वारा नंबर प्लेटें लगाई गई थीं। हालांकि उस दौरान कि न्हीं कारणों से सभी वार्डों में प्लेटें नहीं लग सकी थीं। इनमें स्वच्छता संदेश सहित अन्य कि सी तरह के स्लोगन भी नहीं थे।

संपत्ति की संख्या के आधार पर डाल रहे नंबर

प्रत्येक वार्ड में मकानों की पहचान के लिए नंबर प्लेट लगाने में नगर निगम द्वारा नया तरीका अपनाया जा रहा है। पहली बार ऐसा हो रहा है कि मौजूद संपत्ति की संख्या के आधार पर नंबर प्लेट बनाई जा रही हैं। यदि कि सी वार्ड में 2 हजार संपत्ति है तो एक नंबर से लेकर 2 हजार तक की नंबर प्लेट बनाकर लगाई जाएगी। जबकि पूर्व में गलियों और मार्गो पर दाएं-बाएं स्थित संपत्ति के आधार पर नंबरिंग होती थी।

संपत्ति कर वसूली में मिलेगी मदद

संपत्ति पर दर्ज नंबरिंग के आधार पर नगर निगम के राजस्व विभाग को कर वसूली में बड़ी मदद मिल सके गी। वार्ड मोहर्रिर मकानों पर दर्ज नंबर के आधार पर सूची का मिलाप कर संपत्ति कर वसूल सकें गे। पहले यह व्यवस्था नहीं होने से परेशानियों का सामना करना पड़ता था। जीआईएस सर्वे के बाद ऐसी संपत्ति जो नगर निगम में दर्ज नहीं थी, वो भी चिन्हित हो चुकी है। इन छूटी हुई संपत्तियों पर भी नंबरिंग होने से टैक्स वसूली बढ़ेगी।