खंडवा। खंडवा संसदीय क्षेत्र में भाजपा ने अपनी बादशाहत कायम रखी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कप्तानी में पूर्व प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान ने जीत का 'सिक्सर' लगाया है। इस लोकसभा चुनाव में यह चौहान की छठी और अब तक की सबसे बड़ी जीत है। दो लाख 73 हजार 343 वोट से चुनाव जीतकर चौहान ने जुलूस निकाला। शहर में निकले जुलूस के दौरान घर-घर मोदी के नारे लगे। सुबह आठ बजे से डाइट मतगणना स्थल पर ईवीएम से वोटों की गिनती शुरू हुई। भाजपा प्रत्याशी चौहान और कांग्रेस प्रत्याशी अरुण यादव ने सुबह श्री धूनीवाले दादाजी दरबार में शीश नवाए। इसके बाद मतगणना स्थल पर पहुंचे। यादव जहां मतगणना केंद्र के पास लगे तखत पर लेटे-लेटे ही रुझान जानते रहे, वहीं चौहान मीडिया रूम में देश की स्थिति का जायजा लेते रहे।

'पैसे से लड़ाई में पसीने की जीत'

सांसद निर्वाचित होने के बाद नंदकुमारसिंह चौहान ने कहा कि यह नरेंद्र मोदी और 45-46 डिग्री तापमान में काम करने वाले कार्यकर्ताओं की जीत है। इसके साथ ही पैसे और पसीने की लड़ाई में पसीने की जीत हुई है। सांसद चौहान ने कहा मैं सदैवे क्षेत्र के विकास के लिए सक्रिय रहूंगा। आमजन को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं उपलब्ध करवाने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा। पराजय के बाद कांग्रेस प्रत्याशी अरुण यादव ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का जनादेश सर्वोपरि है। मैं विपक्ष में रहकर भी जनता की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहूंगा। मतगणना पूरी होने के बाद कलेक्टर विशेष गढ़पाले ने सभी अधिकारी कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों, राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों, अभ्यार्थियों व मीडिया का आभार प्रकट किया है।

सातवें चरण में खंडवा में हुए लोकसभा चुनाव में खंडवा सीट पर 76.80 प्रतिशत मतदान हुआ। 2014 में मोदी लहर में चौहान ने अरुण यादव को 3 लाख से ज्यादा मतों से हराया था। 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा ने चार-चार सीटों पर जीत दर्ज की है। 2014 में यहां नंदकुमार सिंह चौहान ने लोकसभा चुनाव जीता था।

खंडवा सीट का इतिहास - इंदिरा गांधी भी नहीं जितवा पाई थी कांग्रेस उम्मीदवार

खंडवा संसदीय सीट पर 1979 के उपचुनाव के समय इंदिरा गांधी गांव-गांव घूमी थीं। यह अलग बात है कि इसके बाद भी वे उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी शिवकुमार सिंह को जीत नहीं दिला सकी थीं। उस समय इंदिरा गांधी को नजदीक से देखने-सुनने वाले शख्स आज भी रोमांचित हो जाते हैं। सांसद परमानंद गोविंदवाला के निधन के बाद खंडवा में उपचुनाव हुए थे। इंदिरा गांधी दिल्ली से भोपाल तक प्लेन से आई लेकिन खंडवा तक आने के लिए उन्हें हेलिकॉप्टर नहीं मिला। तब प्रदेश में भाजपा की सरकार थी।

इस वजह से वे भोपाल से होशंगाबाद तक ट्रेन से आईं। होशंगाबाद से उन्हें लेने शिवकुमार सिंह गए थे। इसके बाद खंडवा, बुरहानपुर, मांधाता के 50-60 गांवों का इंदिरा ने दौरा किया। खंडवा में जब वे खुली जीप में सवार होकर निकलीं तो दोनों तरफ लोगों की भीड़ लगी रही। वर्तमान में व्यवसायी और तब कॉलेज स्टूडेंट रहे अरुण सेठी बताते हैं लोगों की भीड़ बिना किसी बुलावे के उन्हें देखने पहुंची थी। लोगों ने चुनाव के लिए भी बिना किसी के कहने पर श्रद्धा से चंदा दिया था। इस चुनाव में कांग्रेस के शिवकुमार को भाजपा के कुशाभाऊ ठाकरे ने हरा दिया था।