उदय मंडलोई, खंडवा। खंडवा संसदीय सीट से भाजपा-कांग्रेस से कौन प्रत्याशी होगा, यह स्पष्ट नहीं है। राजनीतिक दलों के साथ ही आम लोगों के दिल में भी प्रत्याशी को लेकर संशय बना हुआ है। हालांकि यहां भाजपा से नंदकुमारसिंह चौहान और कांग्रेस से अरुण यादव आमने-सामने आते रहे हैं। आगामी चुनाव में भी इन्हीं के मैदान में होने की संभावना है लेकिन राजनीतिक परिद्श्य स्पष्ट होने में अभी समय लगेगा। साथ ही कोई भी उलटफेर हो सकता है। दोनों ही दलों से कई नेता चेहरा बदलकर अपना प्रत्याशी मैदान में उतरवाने की कवायद कर रहे है।

खंडवा लोकसभा सीट खंडवा की तीन, बुरहानपुर-खरगोन की दो-दो और देवास की एक विधानसभा सीट से मिलकर बनाई गई है। इनमें खंडवा, पंधाना, बागली विधानसभा भाजपा के पास तो बड़वाह, भीकनगांव, मांधाता और नेपानगर कांग्रेस के पास है। बुरहानपुर सीट पर कांग्रेस समर्थित निर्दलीय ठाकुर सुरेंद्रसिंह ने कब्जा जमाया है। इस लिहाज से देखा जाए तो भाजपा का पलड़ा कमजोर है। नंदकुमार यहां से लगातार छह चुनाव लड़कर पांच में जीत हासिल कर चुके हैं तो अरुण यादव दो में से एक में जीत और एक में हार का स्वाद चख चुके हैं।

मैदानी स्तर पर नंदकुमारसिंह चौहान ने चुनाव लड़ने की तैयारी प्रारंभ कर दी है। अरुण यादव खंडवा से कटे-कटे रह रहे है लेकिन उनके भाई कृषि मंत्री सचिन यादव सहित टीम सक्रिय है। कड़ी चुनौती रहेगी : लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी कोई भी हो लेकिन दोनों ही दलों के सामने जीतने के लिए कड़ी चुनौती रहेगी। चेहरे पर निर्भरता के साथ ही चुनावी मैनेजमेंट और मुद्दों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। पांच बार जीतने वाले भाजपा के चौहान के लिए भी यह चुनाव आसान नहीं होगा तो अरुण यादव को भी मध्यप्रदेश में सत्तासीन होने का कोई विशेष लाभ नहीं मिलेगा।

भाजपा में चौहान-चिटनीस की राजनीतिक कटुता

भाजपा में नंदकुमार चौहान को बुरहानपुर से विधानसभा चुनाव हारी पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस चुनौती दे रही हैं। वे स्वयं के लिए टिकट मांग रही है। चौहान और चिटनीस की परंपरागत राजनीतिक कटुता के चलते एक-दूसरे के खिलाफ काम किया जाता रहा है। किसी नए नाम पर विचार किया गया तो महादेवगढ़ संरक्षक अशोक पालीवाल भी दावेदारी पेश कर चुके है। इसके अलावा महापौर सुभाष कोठारी, युवा त्रिलोक हुकुमचंद यादव, नरेंद्रसिंह तोमर के नाम पर विचार हो सकता है।

अरुण चुनाव की बजाय दूसरी जुगाड़ में

अरुण यादव लोकसभा की मच-मच में पड़ने की बजाय दूसरे गुंतारे में नजर आ रहे है। नजदीकी सूत्रों का कहना है कि वे राज्यसभा में पहुंचना चाहते हैं या फिर प्रदेश में ही कोई बड़ी जिम्मेदारी लेना चाहते हैं। इसमें अपेक्स बैंक अध्यक्ष के साथ ही कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का पद भी शामिल हैं। अरुण के विकल्प के रूप में पार्टी के पास अमिताभ मंडलोई का नाम सबसे ज्यादा मजबूती वाले नेता के रूप में है। शोभा ओझा का बचपन खंडवा में गुजरा है और वे इंदौर की बजाय खंडवा से लड़ सकती है।