उदय मंडलोई, खंडवा नईदुनिया। खंडवा संसदीय सीट पर 1979 के उपचुनाव के समय इंदिरा गांधी गांव-गांव घूमी थीं। यह अलग बात है कि इसके बाद भी वे उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी शिवकुमार सिंह को जीत नहीं दिला सकी थीं। उस समय इंदिरा गांधी को नजदीक से देखने-सुनने वाले शख्स आज भी रोमांचित हो जाते हैं। सांसद परमानंद गोविंदवाला के निधन के बाद खंडवा में उपचुनाव हुए थे। इंदिरा गांधी दिल्ली से भोपाल तक प्लेन से आई लेकिन खंडवा तक आने के लिए उन्हें हेलीकॉप्टर नहीं मिला। तब प्रदेश में भाजपा की सरकार थी। इस वजह से वे भोपाल से होशंगाबाद तक ट्रेन से आईं।

होशंगाबाद से उन्हें लेने शिवकुमार सिंह गए थे। इसके बाद खंडवा, बुरहानपुर, मांधाता के 50-60 गांवों का इंदिरा ने दौरा किया। खंडवा में जब वे खुली जीप में सवार होकर निकलीं तो दोनों तरफ लोगों की भीड़ लगी रही। वर्तमान में व्यवसायी और तब कॉलेज स्टूडेंट रहे अरुण सेठी बताते हैं लोगों की भीड़ बिना किसी बुलावे के उन्हें देखने पहुंची थी। लोगों ने चुनाव के लिए भी बिना किसी के कहने पर श्रद्धा से चंदा दिया था। इंदिरा मांधाता क्षेत्र के सुलगांव में पहुंचीं तो वहां के मलिक परिवार के साथ दो-ढाई घंटे रहीं। सुलगांव के काका करम हुसैन दबदबे वाले कांग्रेस नेता थे। इस परिवार के साथ इंदिरा ने फोटो खिंचवाए। तब एक बालक का फोटो नहीं निकला तो वह रोने लगा।

तब इंदिरा ने उसके साथ भी फोटो निकलवाया। यह बालक वर्तमान में कांग्रेस नेता अमजद हुसैन मलिक (45 है। अमजद बताते हैं मेरा परिवार कांग्रेसी रहा है। इसी वजह से इंदिरा का विशेष प्रेम बरसा। अर्जुन सिंह, मोतीलाल वोरा, दिग्विजय सिंह भी मलिक परिवार के घर पहुंच चुके हैं। बताते हैं कि इंदिरा उस समय कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष थीं और उनका जबर्दस्त क्रेज था। इस चुनाव में कांग्रेस के शिवकुमार को भाजपा के कुशाभाऊ ठाकरे ने हरा दिया था।

बच्चा रोया तो खिंचवाना पड़ा फोटो

पुनासा तहसील के ग्राम सुलगांव में दौरे के समय बालक के साथ फोटो नहीं खिंचवाने पर वह रोने लगा। बाद में इंदिरा ने उसके साथ फोटो उतरवाया था।

शिवकुमार सिंह ने खाली कर दिया दिल्ली का तख्त

निमाड़ की राजनीति में स्वर्गीय शिवकुमार सिंह का नाम आज भी अदब से लिया जाता है। इसकी वजह यह है कि उन्होंने राजनीति में रहते हुए कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। सांसद रहते उन्होंने बुरहानपुर में शुगर मिल स्थापना के लिए कड़ा संघर्ष किया। तब प्रदेश में अर्जुन सिंह मुख्यमंत्री हुआ करते थे। शिवकुमार सिंह को श्यामाचरण और विद्याचरण शुक्ल गुट का माना जाता था। शुगर मिल के लिए प्रदेश सरकार ने गारंटी देने से इनकार कर दिया तो शिवकुमार सिंह ने दिल्ली में सांसद पद से इस्तीफा दे दिया। उस समय दिल्ली की मीडिया ने खंडवा पहुंचकर लोगों से पूछा था कि यह शिवकुमार सिंह कौन हैं, जिन्होंने दिल्ली का तख्त खाली कर दिया। शिवकुमार सिंह को संजय गांधी का भी काफी करीबी माना जाता था।