खंडवा। विशेष अपर सत्र न्यायाधीश तपेश कुमार दुबे ने शुक्रवार को दुष्कर्म के मामले में दोषी को 20 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।

इस दौरान पीड़िता ने यह कहते हुए दुष्कर्मी को बचाने का प्रयास किया कि वह उससे प्यार करती है। वह अपनी मर्जी से उसके साथ गई थी। उसने उसके साथ कुछ गलत काम नहीं किया। कोर्ट ने पीड़िता के नाबालिग होने से उसके बयान को खारिज कर दिया। सजा के साथ दो हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया।

अभियोजन के अनुसार हेमराज पिता उदयसिंह (22) निवासी बड़नगर 25 अगस्त 2018 को गांव की 15 वर्षीय किशोरी को भगाकर दूसरे गांव ले गया था। वहां उसके साथ दुष्कर्म किया। 27 अगस्त 2018 को किशोरी हेमराज के साथ मिली। पुलिस ने किशोरी को उसके परिवार के हवाले कर दिया। मामले में नर्मदानगर थाने में हेमराज पर दुष्कर्म का केस दर्ज किया गया था।

किशोरी ने कोर्ट के समक्ष कहा कि वह हेमराज से प्यार करती है। उसने अपने माता-पिता को हेमराज से उसकी शादी करने के लिए कहा था। उसकी उम्र कम होने से उन्होंने शादी करने से मना कर दिया। इस बात से नाराज होकर वह हेमराज के साथ चली गई। हेमराज ने उसके साथ कुछ गलत नहीं किया। न्यायाधीश ने किशोरी के अव्ययस्क होने की वजह से उसके बयान को दरकिनार कर हेमराज को 20 साल की सजा दी।