हरसूद, नईदुनिया न्यूज। खंडवा-होशंगाबाद राजमार्ग पर ग्राम आशापुर के समीप प्राचीन आशादेवी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है। यहां वर्षभर दूरदराज से माता के भक्त पूजापाठ, दर्शन, मन्नत और मांगलिक आयोजन के लिए आते हैं। नवरात्र में श्रद्धालुओं का तांता लगता है। मूर्ति की स्थापना चरवाहों द्वारा की गई थी, तभी से यह आस्था का केंद्र बना हुआ है।

आशादेवी माता मंदिर 50 से अधिक वर्ष पुराना है। पंडित गणेश उपाध्याय ने बताया कि यहां चरवाहों द्वारा माता की मूर्ति की स्थापना की गई थी। वर्ष 1968 में ग्राम आशापुर निवासी रघुवीरसिंह चौहान ने मां आशादेवी की प्राण-प्रतिष्ठा कर मढ़ियाकी स्थापना की थी। मंदिर आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होने से लोगो में मां आशादेवी के प्रति आस्था और भक्तिभाव बढ़ता गया। परिणामस्वरूप आज माता के मंदिर में पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजनों के लिए भक्तों की भीड़ लगी रहती है। एक छोटी सी मढिया को जनसहयोग से मंदिर को भव्य रूप दिया गया। प्रतिदिन आने-जाने वाले यात्रियों के अलावा भी सैकड़ों लोग माता के मंदिर में शीश नवाने आते हैं।

नवरात्र में उमड़ती है आस्था

नवरात्र के दौरान विशेष विद्युत सज्जा, पूजापाठ और मंत्रोच्चार की ध्वनि से मंदिर आस्था और आकर्षण का केंद्र बन जाता है। नवरात्र उत्सव पर सुबह और शाम को माता की आरती में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष भक्त शामिल होते हैं। मुख्य मार्ग पर वन क्षेत्र से सटा मां आशादेवी मंदिर के आसपास सागौन व अन्य प्रजाति के घने वृक्ष लगे हैं। घनी हरियाली का मनोरम दृश्य भी भक्तों को मोहित करता है। इसमें दूरदराज के नर्मदा परिक्रमावासी तथा तीर्थ यात्री भी यहां रुककर माता के दर्शन लाभ लेते हैं।

आसपास के क्षेत्रों से आते हैं श्रद्धालु

आशादेवी माता मंदिर की प्रसिद्धि आदिवासी बहुल क्षेत्र में बढ़ी है। दूरदराज के क्षेत्रों में भी माता के बड़ी संख्या में भक्त हैं जो अपने पुत्र- पुत्रियों का विवाह आयोजन, सामूहिक विवाह, मान और अन्य धार्मिक आयोजन करने यहां आते हैं।