खंडवा (ब्यूरो)। खंडवा जंक्शन से करीब 3 किमी दूर आबना नदी के पास किसी ने ट्रेन से दो साल की बालिका को फेंक दिया लेकिन इस नन्हीं परी के भाग्य में जिंदगी लिखी थी। पास से 100 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से गुजरती ट्रेन और नीचे गहरी आबना नदी के बीच ब्रिज पर फंसकर बालिका की जान बच गई।

यहां ड्यूटी कर रहे चाबीमैन को खून में लथपथ हालत में बालिका मिली। वह तुरंत डायल 100 से बालिका को लेकर अस्पताल पहुंचा। यहां जैसे ही पता चला कि बालिका अज्ञात है और उसके साथ माता-पिता नहीं हैं तो नर्सिंग स्टाफ और अन्य मरीज परिजन बन गए। यहां उसका नाम 'मिलू" रखा गया। मरीज भी तकलीफ भूलकर उसके लिए बिस्किट, कपड़े और खिलौने लाने में जुट गए।

सुबह करीब 10 बजे रेलवे ट्रैक पर चेकिंग के दौरान चाबीमैन सतीश प्रभाकर को यह बालिका मिली थी। उसने तुरंत मुकद्दम को फोन कर दूसरे चाबीमैन को ड्यूटी पर भेजने को कहा और डायल 100 को कॉल किया। वह बालिका को लेकर अस्पताल पहुंचा। सतीश ने बताया कि सुबह आठ बजे जब उसने ब्रिज पर चेकिंग शुरू की तो यहां कोई नहीं था। इसके बाद यहां से कुछ ट्रेनें गुजरीं। ऐसा लगता है कि किसी ने बालिका को ट्रेन से फेंका है।

अस्पताल में भर्ती महिलाओं में जागा ममत्व

बालिका को सबसे पहले फीमेल मेडिकल वार्ड में भर्ती किया गया। यहां भर्ती महिलाओं को जैसे ही पता चला कि मासूम के साथ कोई नहीं है तो सभी का ममत्व जाग गया। वे बालिका के पास आ गईं और इलाज में मदद करने लगीं। नर्सिंग स्टाफ ने तुरंत बालिका की ड्रेसिंग की। उसने सिर में गंभीर चोट आई हैं।

जांच में लिया है मामला

बच्ची को ट्रेन से फेंके जाने और गिरने दोनों बिंदुओं पर जांच कर रहे हैं। अब तक किसी ने ट्रेन से गिरने या गुम होने की सूचना नहीं दी है- बीएस बघेल, एएसआई, जीआरपी