खरगोन। मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में छह विधानसभा सीटें हैं। तीन सीटों पर कांग्रेस और तीन विधानसभा सीटों पर भाजपा विधायक काबिज हैं। जिले की तीन सामान्य सीटों क्रमश: खरगोन, बड़वाह में जहां भाजपा काबिज है वहीं कसरावद विधानसभा सीट कांग्रेस के कब्जे में है। तीन सीटें आरक्षित श्रेणी की हैं। मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के ही बीच होता है। कई जगह एंटी इनकंबेंसी के दस्तक भी नजर आ रही है।

दोनों ही प्रमुख दलों में उम्मीदवारी की चाहत में क्षेत्रीय नेता की लंबी फेहरिस्त है। महाराष्ट्र सीमा से जुड़ा यह जिला कई मायनों में महत्वपूर्ण है। इस बार विकास के मुद्दे और अधूरी रही घोषणाओं के बीच मुख्य पार्टी भाजपा व कांगे्रस आमने-सामने होंगी। इनसे अलग पिछले तीन माह में सपाक्स संगठन और उससे जुड़े हजारों लोग हार-जीत की बाजी पलटाने में दमखम दिखा रहे हैं। सपाक्स की सक्रियता ने दोनों बड़े दलों को समीकरण बदलने पर मजबूर कर दिया है।

खरगोन

खरगोन सीट पर लगातार विधायक और फिर आखरी दौर में मंत्री बना दिए गए बालकृष्ण पाटीदार चर्चा में है। उन्हें पाटीदार लीडर माना जाता है। समानांतर गुजरात में पाटीदार राजनीति को जोड़कर प्रदेश के दो महत्वपूर्ण कृषि और श्रम विभाग सौंपा। इधर लगभग छह हजार मतों से पराजित हुए कांग्रेस के रवि जोशी सक्रिय हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया व कमलनाथ खेमे से फिलहाल करीबी बनाए हुए जोशी को पूरा भरोसा है कि वे इस सीट पर दोहराए जाएंगे।

संभावित दावेदार

भाजपा- विधायक बालकृष्ण पाटीदार, बाबूलाल महाजन, रणजीत डंडीर, राजेंद्र राठौर, शालिनी रतोरिया, कल्याण अग्रवाल

कांगे्रस- पूर्व विधायक परसराम डंडीर, रवि जोशी, मंजीतसिंह चावला, मनोज रघुवंशी, तारकेश्वर यादव

महेश्वर

लंबे समय तक कांगे्रस अर्थात पूर्व राज्यसभा सदस्य व मंत्री डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ के नाम से यह सीट प्रदेश में चर्चित रही है। पिछले दो बार से यह सीट राजकुमार मेव के पास रही। इस बार फिर मेव को इंदौर निवासी बताकर नए उम्मीदवार जोर आजमा रहे हैं। कांग्रेस में डॉ. साधौ पिछले लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय हैं। डॉ. साधौ ने पिछले दिनों अपनी दावेदारी को कांगे्रस प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया के प्रवास के दौरान प्रमुखता से रखा था। अरुण यादव समर्थक सुनील खांडे भी सक्रिय हैंं।

संभावित दावेदार

भाजपा- विधायक राजकुमार मेव, संघ के प्रमुख कार्यकर्ता शिवशंकर रोकड़े, रितेश रोकड़े, हेमलता कोचले

कांग्रेस- डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ, सुनील खांडे

भीकनगांव

वर्तमान में कांग्रेस जिलाध्यक्ष झूमा सोलंकी विधायक हैं। उधर भाजपा के लगातार हस्तक्षेप से उन्हें काम करने में दिक्कत आई। इस तरह के आरोप लगाकर यहां आई योजनाओं को दोनों पार्टियां अपना प्रयास बताती रही। सोलंकी को जहां अपनी ही पार्टी के लोगों से परेशानी उठाना पड़ सकती है वहीं भाजपा भी यहां अंदरूनी कलह से जूझ रही है। कहा जा सकता है कि तीनों आरक्षित सीटों में अपने ही कार्यकर्ताओं की नाराजगी और गुटबाजी आगामी उम्मीदवार के लिए परेशानी का सबब बन सकती है।

संभावित दावेदार

भाजपा- धूलसिंह डाबर, नंदा ब्राम्हणे, गुलाबसिंह वास्कले

कांग्रेस- विधायक झूमा सोलंकी, गोपालसिंह रावत, अजमेर सिंह रावत के नाम चर्चा में है।

कसरावद

तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सुभाष यादव ने इस सीट को चर्चित किया। वर्तमान में उनके बेटे सचिन यादव कांग्रेस से विधायक हैं। उन्होंने भाजपा के आत्माराम पटेल को हराया था। पटेल ने 2008 में सुभाष यादव को पराजित किया था। यहां स्वीकृत हुई सिंचाई योजनाओं को लेकर भाजपा-कांगे्रस में श्रेय लेने का घमासान मचा रहा। इस बार पूर्व सांसद अरुण यादव का भी हस्तक्षेप माना जा रहा है।

संभावित उम्मीदवार

भाजपा- पूर्व विधायक आत्माराम पटेल, राजेंद्र यादव, दशरथ पटेल, राजेश बड़ोले, महेंद्र यादव

कांग्रेस- विधायक सचिन यादव

बड़वाह

यहां लगातार तीन बार विधायक रहे हितेंद्रसिंह सोलंकी ने स्थानीय बड़वाह अस्पताल सहित घोषणाओं पर काम किया परंतु इन 15 वर्षों में इंदौर-इच्छापुर अंतर्गत बड़वाह बायपास मार्ग को मूर्त रूप नहीं दिला सके। उधर उनके ही भाई और कांगे्रस के प्रत्याशी रहे राजेंद्र सिंह तीसरे नंबर पर होकर गुमनाम हो गए। इस बार यहां सीधी टक्कर देने वाले निर्दलीय और अब कांगे्रस के सचिन बिर्ला पूरा दमखम लगाए हुए हैं।

संभावित दावेदार

भाजपा- विधायक हितेंद्रसिंह सोलंकी, कर्मचारी नेता लच्छीराम इंगले

कांग्रेस- सचिन बिर्ला, नरेेंद्र पटेल

भगवानपुरा

यहां भी घमासान देखने को मिल सकता है। वर्तमान विधायक कांगे्रस के विजयसिंह सोलंकी के अतिरिक्त अन्य दावेदार भी ताकत झोंक रहे हैं। वहीं भाजपा के प्रत्याशी रहे गजेंद्र पटेल इस जिले के निवासी नहीं होने से उम्मीदवारी की संभावना क्षीण हैं। भाजपा भी जिताऊ चेहरे तलाश कर रही है। दोनों दलों में टिकट चाहने वालों संख्या ज्यादा बताई जा रही है।

संभावित दावेदार

भाजपा- पूर्व विधायक रहे जमनासिंह सोलंकी, रंगा डाबर, कुलदीपसिंह चौहान

कांगे्रस- विधायक विजयसिंह सोलंकी, कमला केदार डाबर, राजेश मंडलोई, गंगाराम सोलंकी

वादे... जो रह गए अधूरे

नर्मदा नहर तृतीय चरण पूर्ण नहीं हो सका।

बेड़िया (बड़वाह) में मिर्च मंडी अस्तित्व में नहीं आ सकी।

झिरन्या (भीकनगांव) अथवा सेगांव (भगवानपुरा) में महाविद्यालय नहीं खुल सका।

निमाड़ संभाग अस्तित्व में नहीं आ सका।

बड़वाह-सनावद बायपास नहीं बन सका।

मुद्दे जो इस बार छाए रहेंगे

नर्मदा नहर और सिंचाई का मुद्दा इस चुनाव में छाया रहेगा। सबसे ज्यादा किसानों को यहां पानी की दिक्कत आड़े आती है।

इंदौर-इच्छापुर मार्ग बायपास को भुनाने की कोशिश रहेगी।

कृषि महाविद्यालय मांग लंबे समय से की जा रही है। चुनाव में इसका जिक्र होगा।

किसान कर्ज माफी को लेकर भी चुनावी मुद्दा बनाया जाएगा।

ऐसे पलट सकता है दांव

निमाड़ क्षेत्र के इस जिले पर दोनों प्रमुख पार्टी भाजपा-कांग्रेस की निगाहें टिकी है। किसी समय कांग्रेस का गढ़ रहे इस जिले में इस समय तीन-तीन विधायक के साथ 50-50% सत्ता भाजपा-कांग्रेस में बंटी हुई है। बड़वाह सीट पर पिछले चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी ने कांग्रेस प्रत्याशी को पछाड़ कर भाजपा को टक्कर दी। इस बार यहां मुकाबला दिलचस्प होगा। सामान्य सीटों पर सपाक्स संगठन की सक्रियता इस बार परंपरागत पार्टी प्रत्याशियों के जीत-हार को प्रभावित कर सकता है।