- पिपल्या खुर्द में चल रही परचरी कथा का समापन

पिपल्या बुजुर्ग। नईदुनिया न्युज

संत सिंगाजी महाराज ने गुरु मंत्र लेने के बाद भक्ति से इतना विस्तार किया कि वे निमाड़ के महान संत बने। जिज्ञासु शिष्य गुरु मंत्र का पात्र है। विश्वास की डोर पकड़ने से सत्य प्रकट होता है। मानव शरीर कुरुक्षेत्र है। इसमें कभी पांडव तो कभी कौरव जीतते रहते हैं। पांडव जीतते हैं तो शरीर में देवीय शक्ति प्रकट होती है और मनुष्य सद् मार्ग की ओर चलने लगता है। शरीर में कौरवों की जीत मनुष्य को पतन की ओर ले जाती है। सभी धर्मों में गुरु प्रधान है। गुरु का महत्व देवता से अधिक है। इंसान को झुकना चाहिए। नहीं झुकने वाले को टूटना पड़ता है।

यह बात समीपस्थ ग्राम पिपल्याखुर्द स्थित संत कालूजी महाराज के समाधि स्थल पर चल रही परचरी कथा के समापन पर वासुदेव भाई ने कही। उल्लेखनीय है कि संत सिंगाजी महाराज के जन्म के पांच सौ वर्ष पूर्ण होने पर यह आयोजन किया गया। कथा के दौरान भजनों पर श्रद्धालु थिरके। आरती करने के बाद प्रसादी वितरित की गई।

भागवत कथा का समापन, दो जोड़ों का विवाह

कसरावद। समीपस्थ ग्राम पीपलझोपा में सात दिनी भागवत कथा का मंगलवार को समापन हुआ। कथावाचक प्रकाश चेतन महाराज ने प्रतिदिन अलग-अलग प्रसंग सुनाए। समापन पर पंडाल में दो जोड़ों का विवाह भी कराया गया। आयोजन के सहयोगी बाबूभाई ने बताया कि प्रतिवर्ष कथा कराई जाती है। लक्ष्मण पाटीदार, जगदीश तिरोले, नारायण तिरोले, हुकुम पाटीदार, नारायण बर्डे सहित ग्रामीणों ने सहयोग दिया। इस मौके पर भंडारा भी रखा गया।

21केजीएन 156 ग्राम पिपल्या खुर्द में कथा का वाचन करते वासुदेव भाई।

21केजीएन 157 ग्राम पिपल्या खुर्द में चल रही कथा के समापन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

21केजीएन 160 ग्राम पीपलझोपा में कथा के समापन पर दो जोड़ों का विवाह कराया गया।