इंदौर, नईदुनिया रिपोर्टर। बेजा बनावटीपन से कोसों दूर, बेबाक, बिंदास और बेतकल्लुफ... हालांकि ये तमाम अल्फाज एक्ट्रेस अंजुम फाकिह की शख्सियत को पूरी तरह बयां करने में नाकाफी मालूम होते हैं, लेकिन इनसे इस शानदार अदाकारा के व्यक्तित्व की एक झलक तो मिल ही जाती है।

अपने सीरियल 'कुंडली भाग्य' के बारे में बात करने के लिए शहर आई अंजुम सही मायनों में आज के यूथ की नुमाइंदगी करती हैं। उनकी जिंदगी खुली किताब की तरह है। महज 18 साल की उम्र में ही किसी ने दिल तोड़ दिया। अरसे तक ब्रेकअप का शोक मनाया। जिसके चलते महीनों तक मनोविश्लेषक की भी मदद लेनी पड़ी। मगर इसी ब्रेकअप ने उन्हें जिंदगी में कुछ कर गुजरने का जज्बा भी दिया।

जिंदगी को जकड़ने वाली रस्मोरिवाज की जंजीरें तोड़कर और औरत को पर्दानशीं बनाने वाली वजनी पोशाकों को धुएं में तब्दील कर जब अंजुम ने रत्नागिरी से मुंबई का रुख किया तब उनके पास महज 6 हजार रु. थे और जेहन में था जुनून हर हाल में खुद को साबित करने का। उस वक्त जिन रिश्तेदारों ने उन पर तोहमतें धरी थीं उनकी नजरों में अब अंजुम की हैसियत स्टार की है।

यूं आई मॉडलिंग, एक्टिंग की दुनिया में

पांच फुट 11 इंच हाइट की अंजुम एयर होस्टेस बनने की कोशिश कर रही थीं मगर उस वक्त बाजार में जारी मंदी के वातावरण के चलते पहले उन्हें मॉडलिंग और फिर एक्टिंग की दुनिया में कदम रखना पड़ा। पांच रुपए की मैगी पर पता नहीं कितने दिन गुजारने पड़े, बांद्रा से अंधेरी का सफर न जाने कितनी दफा पैदल तय करना पड़ा मगर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। शबाना आजमी को अपना आदर्श मानने वाली अंजुम जितनी अच्छी अदाकारा हैं उतनी ही उम्दा शायरा भी हैं।

इसलिए कसौटी पर खरे हैं एकता के सीरियल

'कुंडली भाग्य' सीरियल में करीना बुआ का रोल निभा रही एक्ट्रेस प्यूमोरी घोष का मानना है कि युवा कलाकारों को फुल लेंथ सीरियल के बजाय एपिसोडिक सीरियल्स में ज्यादा काम करना चाहिए। क्योंकि वहां आप महज एक घंटे में पूरे कैरेक्टर को जीने का हुनर सीख जाते हैं। मेरी नजर में असल एक्टर वही है जो बिना संवाद बोले चेहरे के हावभाव से सब कुछ बयां कर दे। ट्रेंड भरतनाट्यम डांसर होने के चलते मैं इस फन में माहिर हूं।