शहडोल से सौरभ पांडेय। महाभारत काल में पांडवों ने अपने अज्ञातवास का कुछ समय शहडोल जिले के बुढ़ार तहसील अंतर्गत लखबरिया गांव में भी बिताया था। जनश्रुति और इतिहासकारों के मुताबिक अज्ञातवास के दौरान पांडवों का शहडोल जिले में विचरण रहा है। इस दौरान वे तब के घने जंगलों के बीच अरझुला क्षेत्र में पहुंचे। वहां रहते हुए एक ऐसी गुफा बनाई जिसमें एक लाख कक्ष थे। इसके बाद उसका नाम लखबरिया पड़ गया। यह क्षेत्र मैकल पर्वत श्रृंखला की तराई में स्थित है।

पुरातात्विक सर्वेक्षण के दौरान मिले शिलालेखों से यह तथ्य सामने आता है कि लखबरिया में स्थित गुफाओं का निर्माण दूसरी- तीसरी सदी से छठवीं सदी के दौरान किया गया होगा। कठोर लाल रेत और मजबूत चट्टानों से निर्मित इस गुफा में अब कुछ ही कमरे सुरक्षित बचे हैं। बाकी सभी का प्रवेश द्वार मिट्टी से दब गया है।

तालाबों के भीतर से मिलते हैं अवशेष : पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि लखबरिया के आसपास खुदाई करने से गुफाओं की श्रृंखला मिलती है। आसपास के तालाबों से आज भी ऐसी कई प्रतिमाएं निकलती हैं तो यह बताती हैं कि पांडवकालीन समय में यहां उनकी गतिविधियां रही होंगी। लखबरिया की गुफाओं का रहस्य जानने आज भी लोग दूर-दूर से शहडोल पहुंचते हैं।

पांडव की गुफाओं के नाम से मशहूर

इतिहासकार मानते हैं कि अज्ञातवास के दौरान पांडव राजा विराट की नगरी सोहागपुर में भी कुछ समय तक रहे हैं। यह लखबरिया से कुछ दूरी पर ही स्थित है। किंवदंती है कि यहां पर पांडवों ने अपने बाण से एक कुंड बनाया था जिसका नाम बाणगंगा पड़ गया। अब इस कुंड में मकर संक्रांति पर विशाल मेला लगता है। इस कुंड से निकले पानी को लेकर लोगों की मान्यता है कि इसका पानी सभी रोगों को दूर कर देता है।

13 गुफाएं आज भी सुरक्षित

लखबरिया की गुफाओं को लेकर मान्यता है कि यहां महाभारत काल में अज्ञातवास के दौरान पांडव पहुंचे थे और एक लाख गुफाओं का निर्माण किया था। जिसके बाद इसका नाम लखबरिया पड़ गया। वर्तमान में लगभग 13 गुफाएं सुरक्षित हैं। बाकी सभी मिट्टी से दब गई हैं। - आर.एन. परमार पुरातत्व विशेषज्ञ, शहडोल