जबलपुर। गोहलपुर के नर्मदा नगर बस्ती नंबर-1 में रहने वाले अधिवक्ता जितेन्द्र तिवारी (44) को कैंटीन से सस्ते दाम में लग्जरी कार दिलाने का झांसा देकर तीन आरोपितों ने 15 लाख रुपए ठग लिए। धोखाधड़ी की जानकारी होने पर अधिवक्ता ने आरोपितों ने रुपए वापस मांगे तो उन्होंने रकम वापस करने से साफ इंकार कर दिया। इससे परेशान अधिवक्ता गोहलपुर थाने पहुंचे और आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज कराया।

केस के सिलसिले में अप्रैल 2017 में कराई थी मुलाकात -

अधिवक्ता जितेन्द्र को अप्रैल 2017 में जिला न्यायालय में पदस्थ बाबू भरत साहू और पाठक जी ने राहुल गवली से मिलवाया था। दोनों ने कहा कि राहुल का प्रकरण कैंट थाने में चल रहा है। उसमें वह आपको अधिवक्ता नियुक्त करना चाहता है। जिस पर जितेन्द्र ने मामले की पैरवी के लिए हामी भर दी।

18 लाख की लग्जरी कार 15 में दिलाने झांसा -

सितंबर 2017 में अधिवक्ता जितेन्द्र को एसयूवी 500 डब्ल्यू 10 कार लेनी थी। जिसकी चर्चा उसने राहुल गवली से भी की। राहुल ने उसे झांसा दिया कि कार 18 लाख की है, लेकिन वह कैंटीन से उसे कार 15 लाख 1 हजार 465 रुपए में ही दिला देगा।

मालखाने में अपने साथी से मिलवाया -

राहुल अधिवक्ता को विश्वास में लेने के लिए अपने साथ मालखाना जबलपुर लेकर आया। जहां उसने गुप्ता साहब से मिलवाया। राहुल और गुप्ता जी की बातों में आकर उसने 19 सितंबर को 6 लाख रुपए दे दिए। दोनों ने कहा कि कार कटनी में बुक कराई है। कार पहले गुप्ता जी के नाम पर होगी, फिर 6 महीने बाद नाम ट्रांसफर हो जाएगा।

22 सितंबर को कार लेने कटनी गया -

22 सितंबर 2017 को राहुल के कहने पर अधिवक्ता जितेन्द्र अपने पिता व पत्नी के साथ कटनी में महेन्द्रा की एजेन्सी में पहुंचे। जहां पर राहुल और गुप्ता जी ने योगेश दुबे के नाम पर कार की कागजी कार्रवाई पूरी कर ली थी। योगेश दुबे ने अपने नाम पर कार फाइनेंस कराई और कागजात में दस्तखत किए। योगेश भी राहुल का साथी है। यहां कार के बाकी के रुपए भी अधिवक्ता ने राहुल को दे दिए। जिसके बाद दोनों ने कहा कि गाड़ी के कागजात मिलने में भी 6 माह लगेंगे। इसके बाद वह कटनी से कार लेकर अपने घर आ गए।

रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस के लिए 3 लाख रुपए लिए -

कुछ दिन बाद अधिवक्ता से राहुल ने रजिस्ट्रेशन और इंश्योरेंस के लिए 3 लाख 1 हजार 465 रुपए लिए। इस बीच 2 अप्रैल 2018 को जितेन्द्र ने हाईकोर्ट गेट नं 2 के पास राहुल से कार के कागजात मांगे, तो उसने कुछ दिन में देने के लिए कहा। 21 अप्रैल को इंश्योरेंस की फोटो कॉपी उसके पिता के नाम से उसके घर में आकर राहुल और गुप्ता जी ने दी। साथ ही कहा कि वह 2 महीने में रजिस्ट्रेशन की कॉपी भी दे देंगे।

इंश्योरेंस कंपनी से पता चला योगेश के नाम पर है कार -

राहुल और गुप्ता जी के जाने के बाद जब अधिवक्ता जितेन्द्र ने इंश्योरेंस कंपनी में फोन किया, तो पता चला कि कार उसके पिता शिवकुमार तिवारी के नाम पर नहीं, बल्कि योगेश दुबे के नाम पर है। इसी बीच कार एजेंसी के कर्मचारी जितेन्द्र के पास आए और बताया कि कार के सिर्फ 4 लाख 63 हजार रुपए ही जमा हुए हैं। यह सुन अधिवक्ता दंग रह गए। वह थाने पहुंचे और आरोपित मोदीबाड़ा कैंट निवासी राहुल गवली, काली चौक सदर निवासी रामबाबू गुप्ता और गाड़ाघाट पाटन निवासी योगेश दुबे के खिलाफ मामला दर्ज कराया।