नगर निगम के बजट को लेकर उठ रहे सवाल

जब फायदे का बजट तो फिर क्यों बेच रही जमीन, ले रहे लोन

नोट नगर निगम के नाम से फोटो है।

छिंदवाड़ा। सोमवार को पेश हुए नगर निगम के बजट को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस पार्षदों का आरोप है कि जब बजट को फायदे का बजट बताया गया है, तो फिर निगम को लोन क्यों लेना पड़ रहा है, जमीन क्यों बेचनी पड़ रही है। यही नहीं इसमें विधायक पर भी आरोप लगाए गए। हालांकि नगर निगम अध्यक्ष का कहना है कि नगर निगम ने फायदे का बजट पेश किया है, जिस जमीन को मुक्त कराया गया। वही बेची जा रही है। यही नहीं नगर निगम के बजट में कुछ भी नयापन नजर नहीं आ रहा है। हालत ये है कि पुराने अमल ही होने बाकी है, आरओबी, बस टर्मिनल की प्रक्रिया काफी धीमी है। जल आवर्धन योजना का काम भी सुस्त है। ऐसे में कांग्रेस पार्षदों का आरोप है कि ये बजट आंकड़े की बाजीगरी है, जबकि निगम की माली हालत काफी खराब हो चुकी है।

विज्ञापन शुल्क आठ गुना बढ़ा

विज्ञापन शुल्क में बजट में आठ गुना इजाफा हुआ है। इसके बाद भी कमाई सिर्फ 24 लाख रुपए ही है। वहीं स्वागत सत्कार के लिए 8 लाख रुपए बढ़ाए गए है, जो बढ़कर 19 लाख 75 हजार रुपया हो गया है। वहीं महापौर को साल भर में 8 लाख और 87 लाख 50 हजार रुपए मिलेंगे। इसके अलावा संपत्ति कर , स्वच्छता कर और मल नाली कर से रकम वसूलने की तैयारी निगम कर रहा है। भले ही नगर निगम में भाजपा के पार्षद इसे बेहतर बजट बता रहे हैं, लेकिन हकीकत ये है कि भाजपा के अंदर ही कई पार्षद नाराज चल रहे हैं, जो बैठक मे शामिल नहीं हो सके। बताया जा रहा है कि महिला पार्षदों को लिंगा में रखा गया।

विज्ञापन खर्च

24 लाख

स्वागत सत्कार 8 लाख

संपत्ति कर

8 करोड़ 58 लाख 52 हजार पांच सौ

जल कर

89 लाख 84 हजार 658

नगरीय विकास उपकर

2 करोड़ 35 लाख 24 हजार586

मल नाली कर 7 लाख 20 हजार

स्वच्छता कर

1 लाख 34 हजार 400

इनका कहना है

ये बजट अपने आप में एक चमत्कार है, जहां एक ओर निगम लोन ले रहा है, जमीन बेच रहा है, वहीं इसे फायदे का बजट बता रहा है।

वासु अली, नेता प्रतिपक्ष नगर निगम कांग्रेस पार्षद दल

बजट में सबका ख्याल रखा गया है, कोई भी नया कर नहीं लगाया गया है। ये बजट पूरी तरह से संतुलित है।

धर्मेंद्र मिगलानी, नगर निगम अध्यक्ष