भोपाल। भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने देश की चर्चित लोकसभा सीटों में शुमार हो चुकी भोपाल सीट से साध्‍वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को अपना प्रत्‍याशी बनाया है। इस सीट पर प्रज्ञा सिंह का पूर्व सीएम और कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता दिग्विजय सिंह से मुकाबला होगा।

भोपाल सीट से पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय मंत्री उमा भारती का नाम भी चर्चाओं में आया था लेकिन दोनों नेताओं ने इसके बाद स्‍पष्‍ट कर दिया था कि वे लोकसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं।

आइये उन कारणों पर नजर डालते हैं जिस वजह से प्रज्ञा सिंह को भोपाल सीट से लोकसभा चुनाव का टिकट मिला है।

भोपाल सीट पर शिवराज सिंह और उमा भारती के इंकार के बाद एक मात्र विकल्प प्रज्ञा सिंह ही थी। मौजूदा सांसद आलोक संजर और भोपाल महापौर आलोक शर्मा का नाम भी आरंभ में चर्चाओं में आया था वहीं विष्‍णुदत्‍त शर्मा का नाम भी सुर्खियों में रहा था।

प्रज्ञा सिंह को जहां प्रखर प्रवक्ता के तौर पर जाना जाता है वहीं राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक संघ में भी उनकी खासी पकड़ है। साधारण, सहज व सरल छवि वाली प्रज्ञा सिंह पार्टी का हिन्दुत्व चेहरा हैं। उनकी स्थानीय नेताओं में भी पकड़ है।

यह बात और है कि इस चुनाव के जरिए उनका सक्रिय राजनीति में पहली बार प्रवेश होगा। जाहिर है चुनाव प्रबंधन की कमी के साथ इससे पहले वे मतदाताओं के बीच नहीं रहीं हैं और उनके पास राजनैतिक अनुभव भी नहीं हैं। वहीं अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच कमजोर पकड़ रहने की बात भी कही जा रही है।

जानकारों का कहना है कि अब भोपाल सीट पर हिन्दू मतदाता ध्रुवीकरण की कोशिश होगी।वहीं पार्टी को मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने के लिए जोर लगाना होगा। प्रज्ञा सिंह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ी रहीं हैं।

वे कई बार भाजपा के लिए प्रचार कर चुकी हैं। मालेगांव बम ब्लास्ट मामले में आरोपी रहीं प्रज्ञा जमानत पर हैं। प्रज्ञा को आरोपी बनाए जाने के बाद कांग्रेस ने पूरे देश में भगवा आतंकवाद का मुद्दा उठाया था।