भोपाल। मध्यप्रदेश में बहुजन समाज पार्टी में लोकसभा चुनाव के लिए टिकट बांटने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके विपरीत समाजवादी पार्टी की प्रदेश इकाई का गठन ही नहीं हो पाया है। अगले पखवाड़े तक नई इकाई के गठन की संभावना जताई गई है। दोनों दलों के बीच उप्र की तर्ज पर चुनावी गठबंधन की बातें भी चल रही हैं।

बसपा ने मुरैना और सतना के प्रत्याशी घोषित कर बाकी सीटों के लिए दावेदारों से बायोडाटा भी मांग लिए हैं।

बसपा प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष यह दावा कर चुके हैं कि यहां भी उप्र की तर्ज पर बसपा-सपा का चुनावी गठबंधन हो गया है। समझौते में सपा को तीन सीटें खजुराहो, बालाघाट और टीकमगढ़ दी गईं हैं जहां बसपा अपने प्रत्याशी खड़े नहीं करेगी।

इसी सिलसिले में बसपा ने बाकी अन्य सीटों के लिए दावेदारों के आवेदन मांग लिए हैं। बसपा के प्रदेश अध्यक्ष डीपी चौधरी का कहना है कि प्रदेश प्रभारी रामजी गौतम को सभी सीटों का फीडबैक सौंप दिया गया है। वह इस संबंध में बसपा सुप्रीमो मायावती से चर्चा कर आगे की रणनीति का ब्योरा देंगे।

इसके विपरीत मध्यप्रदेश में सपा की इकाई अब तक अस्तित्व में ही नहीं है। तीन सप्ताह पहले सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विधानसभा चुनाव में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद प्रदेश इकाई को भंग कर दिया था, लेकिन उसके बाद अब तक नई इकाई गठन की कवायद शुरू नहीं हो पाई है। प्रदेश के कई समाजवादी नेता लखनऊ पहुंचकर अखिलेश के सामने दावेदारी भी जता चुके हैं, लेकिन अभी इस संबंध में कोई निर्णय नहीं हुआ है।

सपा के प्रदेश प्रभारी जगदेव सिंह ने 'नवदुनिया" से एक चर्चा में बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष की उप्र में राजनीतिक व्यस्तता के चलते इस संबंध में निर्णय नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि चुनावी गठबंधन के संदर्भ में भी राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिकृत तौर पर अपनी रणनीति का खुलासा करेंगे। जगदेव ने संभावना जताई कि अगले पखवाड़े तक नई कार्यसमिति गठित किए जाने की संभावना है।