भोपाल। पंद्रहवीं विधानसभा के दूसरे सत्र में भाजपा विधायकों द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के खिलाफ दी गई विशेषाधिकार भंग की सूचना निरस्त हो गई है। उनके अपनी पार्टी की सरकार के मंत्रियों को कार्यशैली में सुधार के लिए दिए गए निर्देशों को विधायिका के विशेषाधिकार हनन का मामला नहीं माना गया है।

18 से 21 फरवरी तक चले विधानसभा सत्र में गृह मंत्री बाला बच्चन के मंदसौर गोलीकांड, वन मंत्री उमंग सिंघार के पूर्व की भाजपा सरकार के कार्यकाल वाला नर्मदा किनारे लगाए गए पौधों और नगरीय विकास एवं आवास मंत्री जयवर्धन सिंह के सिंहस्थ से जुड़े लिखित सवालों के जवाब से कमलनाथ सरकार घिर गई थी।

इन मुद्दों को कांग्रेस ने पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के कार्यकाल में जोरदार ढंग से उठाया था, लेकिन विधानसभा के भीतर मंत्रियों के जवाब से शिवराज सरकार को क्लीनचिट की स्थिति निर्मित हो गई थी। इस पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान पहले बाला बच्चन व उमंग सिंघार को सार्वजनिक रूप से फटकारा था और बाद में पत्र भी लिखा था।

विधानसभा के भीतर मंत्रियों के जवाबों पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की फटकार और निर्देशों पर भाजपा विधायकों ने सदन के भीतर हंगामा किया था। पार्टी विधायक विश्वास सारंग, यशपाल सिंह सिसौदिया और आकाश विजयवर्गीय ने इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति को विशेषाधिकार भंग की सूचना दी थी। सूत्र बताते हैं कि विधानसभा अध्यक्ष ने इसे विशेषाधिकार भंग का मामला नहीं माना। बताया जाता है कि दिल्ली और कुछ राज्यों की विधानसभाओं के मामलों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया।