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    15 की उम्र में धूम्रपान से की तौबा, 12 रुपए रोज जमा कर जोड़ ली बड़ी रकम

    Published: Sun, 03 Dec 2017 08:16 PM (IST) | Updated: Mon, 04 Dec 2017 03:14 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    मंदसौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। महज 15 साल की उम्र में में एक कड़ा संकल्प लिया कि 'जिदंगी भर धूम्रपान नहीं करूंगा। और इसके बदले 12 रुपए रोज बचाकर जीवन की बड़ी खुशियां खरीदूंगा'। और 35 साल बाद आज यह छोटी बचत एक बड़ी रकम बनकर 4 लाख रुपए बन गई है। कोटड़ा बुजुर्ग जैसे छोटे से गांव के जगदीश विश्वकर्मा अब 50 वर्ष के हो गए है। छोटी सी बचत से पहले कच्चे घर को सपनों का आशियाना बनाया। बच्चों का घर भी बसाया और अब बचत की राशि से उनका बुढ़ापा भी संवरेगा।

    कोटड़ा बुजुर्ग के जगदीश विश्वकर्मा किसी मिसाल से कम नहीं। एक छोटा सा अच्छा और सही समय पर लिया गया। फैसला जिदंगी में कितना बड़ा सुखद बदलाव ला सकता है। यह उनका जीवन बताता है। 15 वर्ष की उम्र में ही पिता के साथ मकान बनाने (कारीगरी) का कार्य करने लगे। इसी उम्र के दोस्तों को गुटखा व धूम्रपान पर रुपए उड़ाते देख फैसला किया कि जिदंगी भर न तो धूम्रपान करुंगा और न ही गुटखा खाऊगा।

    इसके बदले रोजाना कुछ रुपए बचाऊगा। छोटी सी बचत जब बड़ी होने लगी तो घर में खुशियां भी दौड़ आई। 25 सालों में घर पर ही गुल्लक में 2 लाख रुपए जोड़ लिए। इन रुपयों से कच्चे घर को तोड़कर पक्का बना लिया। बचत यहीं नहीं रुकी। 10 साल पहले जगदीश ने डाक घर में 12 रुपए रोज का खाता खुलाया था। उस खाते से वर्ष 2020 में 1.30 लाख रुपए उसे मिलेंगे।

    अब तक उन्हे 10-10 हजार रुपए की तीन किश्ते भी मिल चुकी है। इसी बीच छोटी-सी बचत से 2014 में अपने बेटे सोनू एवं बेटी अर्चना की भी धूमधाम से शादी की। इससे पहले बेटे को कॉलेज तक शिक्षा भी दिलाई। जगदीश विश्वकर्मा ने बताया कि आने वाली राशि से बुढ़ापे की जरुरते पूरी करुंगा।

    रिश्तेदारों को बताते हैं धूम्रपान नहीं करने के फायदे

    जगदीश विश्वकर्मा बताते हैं कि उन्हें शराब, बीड़ी, सिगरेट, गुटखा सहित सभी तरह के नशों से नफरत है। कभी, रिश्तेदारी में आने-जाने के दौरान कोई धूम्रपान करते हुए दिख जाता है तो वे उसे टोककर बस यही समझाने लग जाते हैं कि नशे से शरीर और धन दोनों की बर्बादी हो रही है इससे जितना दूर रहोगे उतना सुखी रहोगे। कई बार हंसी के पात्र भी बन जाते हैं पर वे परवाह नहीं करते और अच्छी सीख देते हैं।

    बेटा भी पिता की राह पर

    धूम्रपान और नशे से नफरत के कारण ही जगदीश विश्वकर्मा की गांव व समाज में अच्छी छवि है। मकान बनाने का कार्य करते हुए बचत से खुशियां एकत्र करने वाले पिता की इस नेक शिक्षा का असर बेटे पर भी पड़ा। बेटा सोनू भी पिता की तरह पोस्ट ऑफिस में बचत के रुपए जमा करने लगा। वह 50 रूपए रोज बचत करता है उसके भी उद्देश्य वही है जो पिता के थे। जगदीश की पत्नी धापूबाई ने भी अलग खाता खुलवाया है जिसमें घर खर्च के बाद बचने वाले रुपए जमा कर रही है। धापूबाई के खाते में भी 10 हजार रुपए है। नशीली वस्तुओं को त्यागकर बचतकर रहा परिवार अपनी इस आदत से बहुत खुश है।

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