भागवत कथा में पं. कमलेशजी शास्त्री ने कहा

15 एमडीएस-72 केप्शनः कथा के शुभारंभ पर गांव में पोथी यात्रा भी निकली।

कुचड़ौद। नईदुनिया न्यूज

मां से बड़ा दुनिया में कोई नहीं होता है। कोई कवि मां की उपमा नहीं दे सका, स्वयं ब्रह्मा, विष्णु, महेश भी मां की स्तुति करते हैं। भारत जैसे विशाल देश को भी हम भारत माता कहते हैं। मनुष्य को धन, बल, शक्ति पर कभी घमंड नहीं करना चाहिए। यह शरीर मिट्टी का बना हुआ है और एक दिन मिट्टी में ही मिल जाएगा। गौमाता को कभी लावारिस मत छोड़ो, नहीं तो बड़ा पाप लगेगा।

यह बात पं. कमलेशजी शास्त्री ने श्री सांवरिया गोशाला में भागवत कथा के तीसरे दिन कही। उन्होंने कहा कि माता अनुसूईया की परीक्षा लेने ब्रह्मा,विष्णु, महेश ब्राह्मण के वेश में द्वार पर आए। माता ने दान देना चाहा तो ब्राह्मणों ने कहा कि हम तो आपके हाथों से भोजन ग्रहण करेंगे वह भी जब तब आप निर्वस्त्र होकर भोजन कराएं। तब माता अनुसूइया ने सोचा ये तीनों कोई साधारण ब्राह्मण नहीं हो सकते और माता ने मन में संकल्प लिया कि मैंने अपने पतिव्रत धर्म का पालन किया हो और कभी पर-पुरुष की तरफ देखा न हो तो मुझे भगवान इनके वास्तविक रूप को पहचानने की शक्ति दे। इस पर उन्हें ब्राह्मणों के वेश में स्वयं ब्रह्मा, विष्णु, महेश के दर्शन हुए। तब माता अनुसूइया ने पतिव्रता धर्म सतीत्व के बल पर तीनों ब्राह्मणों को छह माह का बालक बना दिया और निर्वस्त्र होकर भोजन कराया। इस अवसर पर पंच कुंडीय यज्ञ की शुरुआत हेमाद्री स्नान, गणेश पूजन के साथ यज्ञाचार्य बालकृष्ण शास्त्री ने कराई। 19 अप्रैल को यज्ञ पूर्णाहुति, कथा विश्रांति पर ब्रह्मलीन परम पूजनीय स्वामी श्री नित्यानंदजी की प्रतिमा की प्रतिष्ठा एवं भंडारा होगा।