शाजापुर ।जिले में 150 से अधिक प्राचीन कु एं-बावड़ी अनदेखी का शिकार हो गए। यदि इन पर ध्यान दिया जाए तो आसानी से बड़ी आबादी की प्यास बुझाई जा सकती है। शाजापुर में 50, शुजालपुर में 40, कालापीपल में 35 और मोहन बड़ोदिया में करीब 30 प्राचीन कुएं-बावड़ियां हैं। ये 10 से 15 साल पहले तक ये जलस्रोत लोगों की प्यास बुझाते थे लेकि न देख-रेख के अभाव में अब अधिकांश बंद होने की कगार पर पहुंच चुके हैं। कहीं पर कचरा फेंका जा रहा है तो कोई अतिक्रमण की चपेट में आ गए। 2015-16 में तत्कालीन कलेक्टर राजीव शर्मा ने जीर्णोध्दार का प्लान तैयार कराया था लेकि न उनके तबादले के साथ ही प्लान भी कागजों में गुम हो गया।

अनदेखी का शिकार

मां राजराजेश्वरी मंदिर का निर्माण 1018 से 1060 के मध्य राजा भोज ने कराया था। ग्वालियर रियासत काल में महाराज जीवाजीराव सिंधिया ने वर्ष 1912 में चार बीघा जमीन और बावड़ी निर्माण कराकर मंदिर को दान की थी। इस बावड़ी को 107 साल बीत चुके हैं। आज भी इसका पानी नहीं सूखता है। पहले यहां से लोग पीने का पानी भी लेते थे, अनदेखी के चलते 15 से 20 साल बावड़ी जीर्ण-शीर्ण हो गई है। पानी में कचरा नजर आता है। यदि इसी बावड़ी की सफाई करवाकर यहां पर मोटर व टंकी लगा दी जाए तो आसपास के क्षेत्र की जलापूर्ति हो सकती है। शाहजहांकाल के कि ले का प्राचीन कु आं भी समय की मार के चलते मिट्टी से भर गया है।