-बेटमा के दोहरे हत्याकांड के आरोपित पुलिस रिमांड पर

बेटमा। नईदुनिया न्यूज

लाइफ सिटी के चर्चित दोहरे हत्याकांड के तीनों आरोपितों को गिरफ्तार करने के बाद बेटमा पुलिस अब उनका तीन दिन का रिमांड लेकर महत्वपूर्ण सूचना और तथ्य जुटाने में लगी है। वहीं ये बात भी सामने आ रही है कि मुख्य आरोपित धर्मेंद्र बेहद ही शातिर है। पूर्व में वह पुलिस को गुमराह करने के लिए अपने साथियों की जगह निर्दोष लोगों के नाम बताकर उन्हें फंसाता रहा। जून में छह लाख की लूट के रुपयों से उसने प्लॉट खरीदा था। उसकी शेष राशि देने के लिए उसने किराना व्यापारी विध्यांचल को फिर से निशाना बनाया था।

आरोपितों का पता लगाने के लिए पुलिस ने 200 से अधिक लोगों से पूछताछ तो की ही साथ ही पारिवारिक और व्यावसायिक रंजिश के दृष्टिकोण पर कार्य किया। इसमें सफलता नहीं मिलने पर वह बाग -टांडा गैंग, कंजर गिरोह, हिस्ट्रीशीटर बदमाशों तक भी पहुंची पर कोई भी सबूत हाथ नहीं लग पाया। इस पर भी बेटमा पुलिस ने हार नहीं मानते हुए अपराधियों की कार्यशैली पर लगातार नजर बनाए रखी। मुख्य आरोपी धर्मेंद्र के संबंध में सूचीबद्घ गुंडा होने व संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त रहने की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने उससे पूछताछ की तो मामले का खुलासा हो पाया। ज्ञात हो कि हत्यारों को पकड़ने हेतु वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में थाना प्रभारी योगेन्द्रसिंह सिसौदिया व उनकी टीम जी जान से जुटी हुई थी। रविवार को लाइफ सिटी के रहवासियों ने थाना प्रभारी सिसौदिया का स्वागत किया।

निर्दोषों को फंसाता रहा

मुख्य आरोपी धर्मेंद्र साहू पूछताछ के दौरान पुलिस को गुमराह भी करता रहा। उसने अपने साथी के रूप में निर्दोष लोगों के नाम पुलिस को बता दिए। पूछताछ हेतु थाने लाए इन निर्दोष लोगों का जब धर्मेंद्र से आमना-सामना करवाया तब भी वह निर्दोष लोगों से यह कहता रहा कि की मैंने सब बता दिया है तुम भी बता दो। लेकिन आखिरकार पुलिस उसके असली साथियों तक पहुंच ही गई।

एक साथी रवि को भी लगा था चाकू

घटना में शामिल आरोपित रवि भी चाकू लगने से घायल हो गया था। वारदात वाले दिन बैग लेकर भागने के दौरान विध्यांचल व संदीप ने रवि को पकड़ लिया था। इस दौरा धर्मेंद्र और लाखन द्वारा रवि को छुड़ाने के लिए किए गए हमले के दौरान रवि को कमर के दाहिने तरफ चाकू लग गया था। उसने अपने एक दोस्त के साथ प्राइवेट अस्पताल पहुंचकर इलाज कराया था।

रवि और लाखन को बाहर भेज दिया

घटना के बाद धर्मेंद्र ने अपने दोनों साथी को डरा हुआ देख कहीं राज न खुल जाए इस डर से पैसे देकर रवि को ग्वालियर व लखन को गांव भेज दिया था। जब दोनों के दिखाई नहीं देने की चर्चा होने लगी तो सात दिन बाद ही धर्मेंद्र ने दोनों को वापस बुला लिया था।

पहले वाली वारदात को दिया था धर्मेंद्र और लाखन ने अंजाम

जून में पहली वाली वारदात में गाड़ी से पैसे का बैग चुराने वाली घटना को धर्मेंद्र व लाखन ने मिलकर अंजाम दिया था। चुराई राशि में से लाखन को 25 हजार रु. देने के बाद शेष राशि से धर्मेंद्र ने प्लॉट खरीद लिया था। प्लॉट की बची हुई राशि देने हेतु उसने एक और लूट की योजना बनाई। लाखन के साथ नौकरी छूटने से बेरोजगार घूम रहे रवि को अपनी इस योजना में शामिल किया। इसके बाद वे लगातार विध्यांचल के दुकान से घर आने-जाने की रैकी करते रहे और प्लानिंग बनाकर लूट की।

इनका रहा सराहनीय योगदान

मामले का खुलासा करने में एसडीओपी रामकुमार राय, थाना प्रभारी बेटमा योगेन्द्र सिंह सिसौदिया, उनि वीएस सिकरवार, वरसिंह खडिया, मनीष माहौर, सउनि यतिन्द्र मिश्रा, अजीत सिंह पंवार, प्रआ मुकेश नागर , मोहनसिंह, जगदीश, श्रीकृष्ण जाट, आर. योगेश, राजेश पटेल, ज्ञानेन्द्र सिंह, कमलेश बौद्घ, शिवा, संदीप, राजेश, दशरथ, देवकरण, तुलसीराम, अंकिता, सैनिक मधू का सराहनीय योगदान रहा है। उक्त टीम को घोषित इनाम की राशि से पुरस्कृत किया जाएगा।

फोटोकेप्सन

11 बीईटी 02- थाना प्रभारी का सम्मान करते लाइफ सिटी के रहवासी।