सात साल से टूटा पड़ा है आदिवासी गांव का तालाब, कुएं भी सूख गए, नल-जल योजना भी ठप

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फोटो हैं-- 21महू घोड़ा-1 घोड़ाखुर्द गांव में तालाब की फूटी पड़ी मेड़, गांव में पानी की समस्या।

21महू घोड़ा-2 विधायक उषा ठाकुर ने कुछ विशेषज्ञों के साथ किया गांव का दौरा।

21महू घोड़ा-3 विधायक उषा ठाकुर ने कुछ विशेषज्ञों के साथ किया गांव का दौरा।

महू। नईदुनिया प्रतिनिधि

तहसील में पानी की समस्या काफी गंभीर होती जा रही है। इसे लेकर ग्रामीण और दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों के निवासी खासे परेशान हैं। हालात ये हैं कि इन इलाकों में लोगों को पीने के लिए भी पर्याप्त शुद्घ पानी नहीं मिल रहा है। आदिवासी गांव घोड़ाखुर्द के लोग भी इसे लेकर ही परेशान हैं। यहां गेहूं की फसल सूख गई है। पिछले सात सालों से यहां तालाब की मुंडेर टूटी पड़ी है। इसके चलते पानी की भारी कमी है। यही हाल यहां के आसपास के आदिवासी क्षेत्रों में है।

यूनिवर्सल बेसिक इंकम के प्रयोग के लिए चुना गया घोड़ाखुर्द आज फिर बदहाल है। गांव की बदहाली की वजह पानी की कमी है। इसके चलते फसलें सूख रही हैं और लोगों की आर्थिक कमर भी टूट रही है। गांव में दो तालाब हैं, जिनसे पानी की समस्या दूर हो जानी चाहिए थी, लेकिन इनमें से एक तालाब की मुंडेर पिछले सात सालों से टूटी पड़ी है। इसके चलते उसमें पानी नहीं एकत्र हो पा रहा है। गांव में आठ-नौ सौ लोगों की आबादी है। इनके पास फिलहाल पानी के लिए उपयुक्त संसाधन नहीं हैं। गांव के एक युवा मनीष डाबर बताते हैं कि वे कई बार इस बारे में अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कुछ खास नहीं हो सका है। लोगों की परेशानी कायम है। मनीष के मुताबिक यहां नल-जल योजना की लाइन भी बिछाई गई है, लेकिन इसमें भी पानी नहीं आ रहा है।

इंसान तो दूर... मवेशी तक प्यासे

ग्राम के लोग पीने के लिए कुएं के पानी पर ही निर्भर हैं, लेकिन कुओं में भी पानी लगभग खत्म हो रहा है। यहां मवेशी तक के लिए भी पीने को पानी नहीं मिल रहा है। ऐसे में गांव की पूरी आबादी के पास पीने का स्वच्छ पानी उपलब्ध नहीं है। गांव वाले बताते हैं कि पानी की कमी से काफी संख्या में उनके मवेशी मर रहे हैं।

समस्या जानने पहुंची विधायक

ग्रामीण फिलहाल जिस एक तालाब से पानी ले रहे हैं, उसमें भी पाानी न के बराबर रह गया है। ऐसे में जब गर्मी के काफी दिन बचे हैं, यह पानी शायद ही ज्यादा दिनों तक लोगों की प्यास न बुझा सके। इस मामले की शिकायत स्थानीय विधायक उषा ठाकुर तक भी पहुंची थी, लेकिन वे आचार संहिता के चलते इस बारे में खास कदम नहीं उठा पा रही थीं। मतदान के बाद वे मंगलवार को घोड़ाखुर्द पहुंची। ठाकुर ने अपना यह दौरा सामान्य बताया और कहा कि वे जनसमस्याओं को समझने पहुंची हैं और बाद में इस बारे में कोई ठोस कदम उठाया जाएगा। ठाकुर के साथ कोई शासकीय अधिकारी नहीं था। ठाकुर ने बताया कि वे 24-25 मई को ही जिला पंचायत सीईओ और कलेक्टर से मिलकर इस गांव की समस्या दूर करने की अपील करेंगी।

लोगों को जोड़ेंगे

इस बारे में अब जब राजनेता काफी चिंतित नजर आ रहे हैं, तब बताया जाता है कि पानी की समस्या को खत्म करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में जल्दी ही एक अभियान चलाया जाएगा। इसमें स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ स्थानीय ग्रामीणों को भी जोड़ा जाएगा ताकि लोग अपनी नदियों और तालाबों का पानी बचाने के लिए खुद आगे आएं और जागरूक हों। जल संरक्षण के क्षेत्र में काफी काम कर चुकी संस्था नागरथ चेरिटेबल ट्रस्ट के सुरेश एमजी ने बताया कि जल्दी ही गांवों में तालाबों को विकसित करने के लिए वे भी काम शुरू करेंगे।