अजनोद। समीपस्थ ग्राम पाल कांकरिया में मंगलवार सुबह रामकथा का शुभारंभ हुआ। इसके पूर्व ग्राम में कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बालिकाएं शामिल हुईं। कलश यात्रा का गांव में जगह-जगह स्वागत किया गया। रामकथा के दौरान साध्वी मीरा दीदी ने बताया कि रामकथा सुनने से मनुष्य प्राणी के पाप कष्ट दूर हो जाते हैं। उन्होंने कथा के दौरान बताया कि हमेशा माता-पिता और गुरु की सेवा करनी चाहिए। सुबह राम भजन के नाम से शुरुआत करनी चाहिए। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्घालु मौजूद थे। राम धुन के साथ भजन-कीर्तन हुए व्यासपीठ का पूजन उपसरपंच जसवंत सिंह और भाजपा के वरिष्ठ नेता राजाराम गोयल ने किया।

फोटो-21पाल3- ग्राम पाल कांकरिया में कलश यात्रा निकाली गई।

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दिल मिले न मिले, हाथ जोड़कर जय जिनेंद्र जरूर बोलना

प्रसन्नासागरजी ने सुखी जीवन के सूत्र बताए

संत सदन का उद्घाटन हुआ

हातोद। नईदुनिया न्यूज

नगर में मंगलवार को हातोद-देपालपुर रोड पर संत सदन का उद्घाटन हुआ। इस मौके पर प्रसन्नासागरजी ने आशीर्वचन दिएा। उन्होंने सुखी जीवन के सूत्र बताते हुए कहा कि सदैव मुस्कुराना, दिल मिले या न मिले, हाथ मिलाकर जय जिनेन्द्र बोलना। अपने दुश्मन की हमेशा तारीफ करें।

उन्होंने कहा कि जीवन में संग्रह कम करें। मेरी भावना जरूर पढ़ें। जीवन में संतों के लिए संत सदन जरूर बनाएं। जो नहीं है, उसका दुख दूर करने के बजाए जो है उसमें सुखी रहें। कार्यक्रम के आयोजक इंद्र कुमार सेठी को आज उनकी सालगिरह पर 108 इंद्र कुमार बनने का आशीर्वाद दिया। इससे पहले मंगलाचरण श्रुति बाकलीवाल, सुप्रिया सेठी, सिमल सेठी ने प्रस्तुत किया। महाराज सा. का पाद प्रक्षालन सेठी परिवार द्वारा किया गया। संचालन चिराग जैन ने किया। आभार अंकुर सुप्रिया सेठी ने माना। इस संत सदन में विहार के दौरान जैन समाज के संतों की रुकने की व्यवस्था की जाएगी।

रत्नसुंदर सूरीश्वरजी ने बताई पांच पीड़ाएं

हातोद के समीपस्थ आत्मानंद बाग गोशाला में राष्ट्रसंत राजप्रतिबोधक ,सरस्वती लब्ध प्रसाद, पदमविभूषण रत्नसुंदर सूरीश्वरजी ने अपने प्रवचन में पांच पीड़ा के बारे में बताया। 1. दुर्बुद्घि : सभी पापों का मूल कारण खराब विचारधारा और दुर्बुद्घि है। यदि आपको कहा जाए कि आपकी ही चले तो आप क्या करना चाहेंगे। क्या बनना चाहेंगे? भगवान ने तो सोचा था कि मेरी चले तो सभी जीवों को मोक्ष में ले जाऊं। भगवान आपके पास में है तो भी दुर्विचार आ सकता है। परंतु यदि सद्बुद्धि होगी तो खराब परिस्थिति में भी सद्विचार आएगा। 2. दोष : मन के दोष क्रोध, लोभ, वासना, ईर्ष्या आदि है। कोई स्वयं के सामर्थ्य से आगे बढ़े तो ईर्ष्या क्यों? 3. दुष्कार्य : आंख में विकार दोष है, कोई नहीं देखता। मुक्ति और संसार का कारण खराब विचार है। 4. दरिद्रता : स्लम एरिया में रहना, खुली गटर, अच्छे हॉस्पिटल की कमी, अच्छे स्कूल की कमी डिस्टर्ब करती है। आपको क्या चाहिए दरिद्रता या सौभाग्य। सुदामा, पुणिया , शबरी तीनों दरिद्र थे, परंतु सुदामा के मन में कृष्ण, पुणिया के मन में महावीर व शबरी के मन में राम बसे थे। ये सभी दरिद्र होने पर भी दरिद्र नहीं थे। दरिद्रता में यदि भगवान आपके साथ है तो आप सभी को हैंडल कर पाएंगे। 5. दुख : पाप का फल दुख है, पर वह कोई नहीं चाहता, फिर भी पाप जरूर करते हैं।

(हातोद के दो फोटो हैं)