टेस्टिंग ट्रैक इलाके में नए औद्योगिक क्षेत्र बनाने के लिए सागौर से निकाली जा रही लाइन, रहवासियों-जनप्रतिनिधियों सभी का विरोध लेकिन काम जारी

सागौर-महू। औद्योगिक क्षेत्र को स्थापित करने के लिए सागौर के रहवासियों को खतरे में डाला जा रहा है। दरअसल यहां ऑटो टेस्टिंग ट्रैक के पास एक हिस्से में बनाए जा रहे औद्योगिक क्षेत्र में बिजली सप्लाई के लिए सागौर के बीच से हाईटेंशन लाइन निकाली जा रही है। घनी आबादी के इस इलाके में इससे जान-माल का खतरा तो होगा ही, साथ ही सड़क चौड़ीकरण के काम में भी परेशानी आएगी। इसे लेकर ग्रामीण अब परेशान हैं और लगातार विरोध कर रहे हैं। कुछ जनप्रतिनिधि उनके साथ हैं, लेकिन संबंधित विभागों के अधिकारी इसी क्षेत्र से लाइन निकालने को लेकर आमादा हैं।

ऑटो टेस्टिंग ट्रैक से बची हुई जमीन पर अब एकेवीएन द्वारा एक औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। बिजली सप्लाई के लिए यहां हाईटेंशन लाइन बिछाने का काम करीब सात महीने से जारी है। पिछले दिनों पावर हाउस से होकर कुमारभट्टा तिराहे तक और छोटी सागौर मुख्य मार्ग से थाना रोड होते हुए ऑटो टेस्टिंग ट्रैक के नजदीक नए स्थापित हो रहे सब स्टेशन तक 33 केवी की हाईटेंशन लाइन के लिए रास्तों पर गड्ढे खोदे जाना शुरू किए गए तो रहवासियों ने विरोध शुरू कर दिया जिसके बाद काम रुक गया।

और भी जगहों से जा सकती है लाइन

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह लाइन और भी जगहों से डाली जा सकती है जैसे पॉवर हाउस से जंगल के रास्ते होते हुए यह लाइन सीधे टेस्टिंग ट्रैक के नजदीक पहुंचाई जा सकती है। इसके अलावा इंडस्ट्रियल पार्क के नजदीक कुंवरसी के पॉवर हाउस से ये लाइन भी ले जाई जा सकती है, लेकिन ऐसा भी नहीं किया जा रहा है। खबरों की मानें तो इन दोनों स्थानों से लाइन डाले जाने में काफी लागत आ सकती है, इसलिए सागौर के बीच से यह लाइन बिछाई जा रही है, लेकिन इससे हो सकने वाले नुकसान पर कोई विचार नहीं किया जा रहा है।

विरोध के बाद काम रुका

छोटी सागौर के पास नाले के रास्ते होते हुए पेट्रोल पंप, हायर सेकंडरी स्कूल और सोसाइटी के सामने थाना रोड क ेपास तक खंभे लगा दिए गए हैं, लेकिन थाना रोड और सोसायटी रोड पर ज्यादा घनी आबादी होने से लोगों ने अपने घरों के सामने गड्ढे खोदे जाने का विरोध किया है और इसके कारण काम रुका हुआ है। लोगों द्वारा विरोध के दौरान एसडीएम वीरेंद्र कटारे, पीथमपुर तहसीलदार विनोद राठौर एवं सीएमओ गजेंद्र सिंह बघेल ने एकेवीएन के अधिकारियों, निर्माण एजेंसी एवं प्रभावित नागरिकों के समक्ष पोल लगाने की सहमति बनाने का प्रयास किया, लेकिन इस पर अब तक सहमति नहीं बन सकी है।

समझाया पर नहीं मानें लोग

अधिकारियों ने इस मामले में लोगों को समझाने का प्रयास भी किया। उन्होंने बताया कि इन मोनोपोल खंभों से किसी को कोई खतरा नहीं होगा, क्योंकि इनकी ऊंचाई काफी होती है। वहीं उद्योग क्षेत्र बन जाने से लोगों को नौकरी मिलेगी, लेकिन तमाम समझाइश के बाद भी लोग तैयार नहीं हुए।

यह होंगी परेशानियां

इन खंभों के लगने से लोगों को खासी परेशानी हो सकती है। आबादी पर करंट का खतरा तो होगा ही, साथ ही यहां करीब तेरह करोड़ की लागत से सागौर कुटी और सागौर के बीच एक सिंगल लेन सड़क बनाए जाने का काम भी प्रभावित होगा। बताया जाता है कि खंभे इसी सड़क के बीच में लगाए जाएंगे जो बाद में यातायात में बाधक साबित होंगे।

-रहवासियों से बात हुई है। बीच सड़क पर खंभे लगाने की बात पर सहमति बनी है। -एके पाल, अधिकारी, एकेवीएन

- इस रास्ते को तकनीकी रूप से ज्यादा बेहतर माना जा रहा है, इसलिए अन्य दो रास्ते नहीं चुने जा रहे हैं।- विनोद राठौर, तहसीलदार, पीथमपुर

-बिजली लाइन के पोल जिन लोगों के घर के सामने आ रहे हैं, उन लोगों की थाने पर एसडीएम, तहसीलदार, सीएमओ और एकेवीएन अधिकारियों के साथ बैठक हुई। उसमें घरों के सामने पोल लगाने पर सहमति नहीं बन सकी है। इसलिए सड़क के बीच में पोल लगाने का निर्णय हुआ है। -प्रतीक शर्मा, थाना प्रभारी सागौर

- हम आबादी क्षेत्र से हाईटेंशन लाइन निकालने का विरोध करते हैं। इस बारे में हमने कलेक्टर से मुलाकात कर अपना विरोध भी जताया है।- हंसराज पटेल, उपाध्यक्ष नपा पीथमपुर

यहां परेशानी के बाद हटाई जा रही लाइनें

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पीथमपुर के कई क्षेत्र पहले ही हाईटेंशन लाइन के खतरे से जूझ रहे हैं। छत्रछाया, जयनगर जैसे घनी आबादी वाले इलाकों के ऊपर से निकली हुई इस लाइन से कई बार हादसे हो चुके हैं, जिनमें लोगों की जान तक गई है। लगातार विरोध के बाद अब यहां दो करोड़ रुपए खर्च कर बिजली कंपनी यहां से लाइन हटाने पर काम कर रही है, वहीं दूसरी ओर सागौर की आबादी वाले इलाके में से यह लाइन डाली जा रही है।