गौतमपुरा। स्थानीय दिगंबर, श्वेतांबर तथा स्थानकवासी जैन समाज के लोगों ने मिलकर महावीर जयंती पर संयुक्त रूप से बैंडबाजों के साथ जुलूस निकाला। प्रातः नौ बजे महिलाएं लाल चुनरी में और पुरुष सफेद वस्त्र में जुलूस में शामिल हुए। बालिकाएं कलश लेकर चल रही थीं। युवतियां साफा पहनकर शामिल हुईं। जुलूस के साथ चल रहे रथ में भगवान महावीर की झांकी थी। जुलूस का जगह-जगह स्वागत किया गया। समाज के लोगों ने पालकी का पूजन किया। महिला मंडल द्वारा प्रभावना वितरित की गई। जुलूस में महावीर स्वामी द्वारा दिए गए संदेश 'जियो और जीने दो' का उद्घोष हुआ। दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष दिलीप सोगानी, श्वेतांबर जैन समाज के अध्यक्ष विजय जैन, स्थानकवासी जैन समाज के अध्यक्ष विकास मेहता ने लोगों को महावीर जयंती की शुभकामनाएं दी। दोपहर में पंचकल्याणक महापूजन का आयोजन हुआ। जुलूस में कंवरलाल जैन, मांगीलाल मेहता, प्रेमचंद जैन, विमल झांझरी, सचिन मेहता, प्रकाश जैन, विप्लव मंडोवरा, रविंद्र मंडोवरा आदि शामिल थे। शाम को स्वामी वात्सल्य का आयोजन हुआ। रात्रि में मंदिरों में महाआरती हुई। इस बार महावीर जयंती के उपलक्ष्य में तीन दिनी आयोजन के दौरान विभिन्ना प्रतियोगिताओं के विजेता बच्चों को पुरस्कृत किया गया।

अजनोद। दिगंबर जैन मंदिर में जैन समाज ने महावीर जयंती धूमधाम के साथ मनाई। समाज के रमेशचंद पाटोदी ने बताया कि भगवान महावीर का विशेष अभिषेक कि या गया। ग्राम कछालिया में में पर्व मनाया गया। समाज के कैलाश चंद्र जैन ने बताया कि पर्व के दौरान अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए।

हातोद। महावीर जयंती पर जैन समाज ने जुलूस निकाला। नगर भ्रमण के जगह-जगह समाजजनों ने गवली की। मंदिर पहुंच कर लोगों ने बोलियां ली।

पालिया। दिगंबर जैन समाज द्वारा भगवान महावीर की जयंती मनाई गई। समाज द्वारा सुबह चल समारोह बैंडबाजों के साथ निकाला गया। समाज के केवलचंद जैन ने बताया कि भगवान महावीर का मस्तकाभिषेक किया गया। महिलाओं द्वारा भजन किए गए। समाज के नेमीचंद जैन, प्रकाश जैन, कमल सावलिया, केवल जैन, ज्ञानचंद्र जैन, प्रभात जैन, विजय जैन व महिला मंडल सदस्य जुलूस के साथ चल रहे थे।

देपालपुर। जैन समाज द्वारा महावीर जयंती पर तिलक मार्ग स्थित दिगंबर जैन मंदिर से चल समारोह निकाला गया। समारोह जैन मंदिर से शुरू हुआ जो विभिन्ना मार्गों से होकर पुनः मंदिर पहुंचा। जगह-जगह वेदीजी में विराजमान भगवान महावीर की पूजा-अर्चना की गई। वेदीजी को युवा कंधे पर उठा कर चल रहे थे। वेदीजी की अगवानी में महिलाएं मंगल गीत के साथ नृत्य करते हुए चल रही थीं।