इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि । भाई की हवस का शिकार बनी किशोरी पांच माह का गर्भ लिए देर रात सड़क पर अकेली निकल आई। वह इतना डरी हुई थी कि लोगों ने उसे मंदबुद्धि समझ लिया। 12 घंटे की काउंसिलिंग के बाद उसने चुप्पी तोड़ी और कहा भैया ने गंदा काम किया।

रिश्तों को तार-तार करने वाला वाकया बुधवार देर रात सामने आया। पंद्रह वर्षीय पीड़िता रात करीब 12 बजे राऊ क्षेत्र में एमराल्ड हाइट्स स्कूल के बाहर सड़क पर अकेली बैठी थी। उसे अकेला देख राहगीरों ने 1098 पर कॉल किया। देर रात चाइल्ड लाइन की टीम पुलिस के साथ पीड़िता को लेने पहुंची। रात में ही पीड़िता का जिला अस्पताल में मेडिकल करवाया गया। प्राथमिक जांच में पीड़िता को 5 माह का गर्भ होना पाया गया। रात में और अगले दिन सुबह भी पीड़िता से बातचीत के सभी प्रयास विफल रहे।

वह इतनी घबराई हुई थी कि वह मंदबुद्धि की तरह हरकत कर रही थी। गुरुवार सुबह चाइल्ड लाइन सदस्य ने दोबारा पीड़िता से बात करना शुरू की। दिनभर उसकी आंख से सिर्फ आंसू बहते रहे, लेकिन जुबां से कोई शब्द नहीं निकला। आखिर शाम को उसकी चुप्पी टूटी। उसने बताया कि वह देवास जिले के उदयपुर थाने के पिपरीबाजार की रहने वाली है। वह आठवीं में पढ़ती है।

6 महीने पहले उसके चचेरे भाई ने खेत पर ले जाकर जबरदस्ती की थी। ऐसा उसने दो बार किया। घर में किसी को भी यह बात बताने पर जान से मारने की धमकी दी थी। इससे वह बहुत ज्यादा डर गई थी। जब उसे गर्भवती होने का एहसास हुआ तो वह माता-पिता का सामना करने की हिम्मत नहीं कर पाई। पीड़िता ने बताया कि वह इंदौर में मां के साथ अपनी बड़ी बहन के घर आई थी। बस स्टैंड पर मां के बस में बैठ जाने के बाद वह उतरकर निकल आई।

भैया ने मेरे साथ किया गंदा काम -

पीड़िता अब भी ज्यादा कुछ कहने की स्थिति में नहीं है। उसके मुंह से बार-बार यहीं निकलता है कि मुझे बहुत डर लग रहा है। मम्मी-पापा के सामने कैसे जाऊंगी। भैया ने मेरे साथ गंदा काम किया। चाइल्ड लाइन समन्वयक जितेंद्र परमार ने बताया कि लंबी काउंसिलिंग के बाद पीड़िता ने हकीकत बताई। उसके द्वारा बताए पते पर माता-पिता से संपर्क हो गया है। संभवतः वह शुक्रवार को यहां पहुंच जाएंगे। फिलहाल पीड़िता को बाल कल्याण समिति के आदेश पर आश्रय गृह में रखा गया है।