मुरैना (अनिल तोमर)। अंचल में नया साल बेटियों का होगा। क्योंंकि कहा जाता कि नए साल के शुरू होने से कुछ अच्छा होता है तो साल भर अच्छा ही होता है। बेटियोंं का साल इसलिए होगा, क्यों साल के पहले ही दिन रात 12 से लेकर सुबह 11 बजे तक जिला अस्पताल की मेटरनिटी में कुल 22 बच्चों ने जन्म लिया। इनमें 13 बेटियां थी और 9 बेटे थेे। चूंकि अंचल महिलाओं की कम संख्या के मामले में सबसे ऊपर हैं। ऐसे में नए साल में कुछ समय के अंतराल में इतनी बेटियों का जन्म होना लिंगानुपात मेंं सुधार के अच्छे संकेत हैं।

बता दें कि प्रति एक हजार पुरुषों की तुलना में मुरैना में महज 840 महिलाएं हैं। प्रदेश में कम महिलाओं के मामले में मुरैना दूसरे नंबर पर है। पहले नंबर पर चंबल का ही दूसरा जिला भिण्ड है। ऐसे में यह बात चिंता का विषय है। हालांकि महिला व पुरुष के लिंगानुपात में धीमी गति से सुधार आ रहा है।

इसलिए कम हैं अंचल में महिलाओं की संख्या

2001 से पहले जिले में भ्रूण लिंग परीक्षण व गर्भपात होता था। अंचल में अभी भी बेटे को परिवार का वंश बढ़ाने वाला माना जाता है। लगातार अंचल में महिलाओं की संख्या कम होने के बाद शासन व प्रशासन हरकत मेंं आया। कन्या भ्रूण परीक्षण पर सख्ती से रोक लगाई। इसके बाद अंचल में लिंगानुपात में सुधार आना शुरू हुआ।

2001 मेंं जहां पर जिले में एक हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या 822 थी। वही 2011 में बढ़कर 840 हो गई। यदि एनएचआरएम के हैल्थ बुलेटिन की रिपोर्ट माने तो 2016 मेंं जिले में एक हजार पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या 855 हो गई। यानि जिले में बेटियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।

2019 की शुरुआत में जन्म लिया बेटे ने ही मेटरनिटी में नए साल की शुरुआत में यानि रात 12 बजकर 1 मिनट पर बानमोर की प्रसूता सरिता को बेटा हुआ। लेकिन इसके बाद बेटियोंं का जन्म होना शुरू हुआ। रात 12 बजे से लेकर सुबह 11 बजे तक 13 बेटियां व 9 बेटे हुए।