मुरैना। पहाड़गढ़ के जंगलों में बसे आदिवासी बाहुल्य गांवों में रात के समय कोई भी मेडिकल इमरजेंसी होने पर उन्हें 108 एंबुलेंस सेवा की मदद नहीं मिल पाती। पहाड़गढ़ के जंगलों में छिपे रहने वाले बदमाश नहीं चाहते कि रात के समय एंबुलेंस यहां आए। बत्ती जलाकर और सायरन बाजकर जाने वाली एंबुलेंस को बदमाश पुलिस के वाहन समझते हैं और फायरिंग तक करने लगते हैं। यही वजह है कि बदमाशों ने 108 सेवा के कर्मचारियों को हिदायत दे रखी है कि वे यहां रात में कतई न आएं।

पहाड़गढ़ के जंगलों सहित चंबल के बीहड़ के कुछ गांवों में रात के समय 108 एंबुलेंस नहीं जाती। एंबुलेंस सेवा के जिला समन्वयक बालकृष्ण उपाध्याय के मुताबिक बदमाशों द्वारा एंबुलेंस रोककर दी जाने वाले धमकियों और फायरिंग की घटनाओं के बद विधिवत पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को अधिकारी लिखित में कह चुके हैं कि रात के समय वे इन गांवों में नहीं जाएंगे।

उपाध्याय के मुताबिक दो माह पूर्व एक केस अटेंड करने के लिए 108 एंबुलेंस के कर्मचारी पहाड़गढ़ के धौंदा-कन्हार के जंगलों से गुजर रहे थे। इसी बीच कुछ बदमाशों ने सड़क बाधित कर एंबुलेंस को रोक दिया और दोबारा रात के समय जंगलों में न होने की बात कही। उपाध्याय की मानें तो पुलिस को इसकी लिखित शिकायत उनके द्वारा की गई। इस पर पुलिस ने भी रात के समय इस इलाके में असुरक्षा की बात कहकर एंबुलेंस को यहां न आने की सलाह दी।

इधर कैथोदा में हुई फायरिंग

108 एंबुलेंस सेवा के अधिकारियों ने बताया कि करीब 7 से 8 महीने पहले एंबुलेंस कैथोदा इलाके में केस रिसीव करने गई थी। यहां पर रेत माफिया ने बत्ती देखकर और सायरन बजता देखकर एंबुलेंस पर फायर करने शुरू कर दिए। यहां भी कर्मचारियों को कहा गया कि रात के समय एंबुलेंस लेकर इस इलाके में न आएं। इसके बाद बीहड़ के गांवों में भी एंबुलेंस रात के समय नहीं पहुंचती है।

गार्ड उपलब्ध करा रही पुलिस

इस मामले में पहाड़गढ़ थाना प्रभारी अविनाश सिंह कहते हैं कि पहाड़गढ़ का जंगल पूरी तरह से सुनसान है और रास्ता भी खराब है। इसलिए एंबुलेंस सेवा के लोग कई बार अगर इस इलाके में जाते हैं तो वे थाने से एंबुलेंस में गार्ड भेजते हैं। हालांकि एंबुलेंस सेवा के लोग इस इलाके से इतने खौफजदा है कि ज्यादातर वे यहां जाने से बचने का प्रयास किरते हैं।

पहाड़गढ़ के ये गांव प्रभावित

एंबुलेंस रात के समय कन्हार और धौंधा के जंगलों को पार नहीं करती। जिसके चलते इन जंगलों मंे बसे खोरा, खोरी, गैंतोली, धौंधा, कन्हार, रकैरा, धोबिनी और पाल-झीनियां गांवों में के लोग रात के समय मेडिकल इमरजेंसी के दौरान असहाय हो जाते हैं। इधर कैथोदा और आसपास के गांवों में एंबुलेंस फायरिंग के डर से नहीं जाती।

इनका कहना है

पहाड़गढ़ में बदमाशों ने दो महीने पहले एंबुलेस घर कर यहां न आने की धमकी दी। पुलिस ने हमें लिखित में यहां रात के समय न आने की बात कही। इसकी प्राप्ति है हमारे पास। कैथोदा और आसपास के इलाके में तो एंबुलेस देखकर बदमाश फायरिंग ही शुरू कर देते हैं। इसलिए इन इलाकों में रात के समय एंबुलेंस नहीं भेजते - बालकृष्ण उपाध्याय, जिला समन्वयक, 108 मुरैना