मुरैना। पुलिस मुख्यालय द्वारा हर साल की तरह इस साल भी पहले अवैध शराब और फिर अवैध हथियारों को पकड़ने के लिए अभियान चलाने के निर्देश सभी जिलों को दिए थे। यह अभियान 15 दिन तक चलना था। अभियान के तहत कट्टे पकड़ने के केस बनाए जा रहे थे। इसी दौरान पुलिस अधीक्षक ने कर्मचारियों के लिए कट्टाधारी पकड़ने, कट्टा बेचने वाले एजेंट पकड़ने और अवैध हथियार बनाने की फैक्टरी और गिरोह पकड़ने पर 5 से 10 हजार तक के इनाम की घोषणा कर दी। इसके बाद एक के बाद एक दो ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिनमें पुलिस को काफी परेशानी उठानी पड़ी।

3 फरवरी को पर्वतपुरा गांव में अवैध हथियार के शक में आरोपित रवि सिकरवार को पकड़ने गई पुलिस को लोगों ने बंधक बना लिया। इसके बाद 4 फरवरी को आर्म्स एक्ट में पकड़े गए आरोपित रघुराज तोमर ने दिमनी थाने की हवालात में फांसी लगा ली। दोनों ही मामलों में पुलिस से कुछ खामियां छूट गईं। जिसके कारण पुलिस को बैकफुट पर आना पड़ा, लेकिन पुलिस इस बात को स्वीकार नहीं कर रही है कि इन घटनाओं के पीछे इनाम वाला आदेश जिम्मेदार है। जबकि दोनों ही मामलों में इस बात की आशंका जताई जा रही है कि इनाम पाने के चक्कर में कर्मचारी जैसे-तैसे इस तरह के केस बनाने में जुटे थे।

सामान्य अभियान चलने तक नहीं हुई घटना

पीएचक्यू के आदेश के तहत 25 जनवरी के आसपास अवैध हथियारों के खिलाफ पुसिल का अभियान शुरू हो चुका था। 30 जनवरी तक दैनिक अपराधिक विवरण की डायरियों में जमकर कट्टेधारी पकड़े जाने के केस आ रहे थे, लेकिन 30 जनवरी को एक आदेश जारी हुआ। जिसमें कहा गया कि कट्टा पकड़ने वाले पुलिस कर्मी को 2 हजार, एजेंट पकड़ने पर 5 हजार और फैक्टरी व गिरोह पकड़ने पर 10 हजार इनाम दिया जाएगा। इस आदेश को 1 फरवरी तक सभी जगह भेज दिया गया। इसके बाद 3 फरवरी को पर्वतपुरा में पुलिस को बंधक बनाया गया और 4 को दिमनी में आर्म्स एक्ट के आरोपित ने आत्महत्या कर ली।

ये तथ्य जो बयां कर रहे क्रेडिट का खेल

क्रेडिट लेने के फेर में कर्मचारियों द्वारा की गई कुछ गलतियां पुलिस को पीछे हटने के लिए विवश कर रही हैं। मसलन पर्वतपुरा के आरोपित रवि के खिलाफ आबकारी एक्ट में जो वारंट था, उस पर 2 फरवरी को ही रवि सिकरवार को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी। इससे पहले रवि पर कोई मामला दर्ज नहीं था। इसी तरह दिमनी मामले में पुलिस पर आरोप है कि बंदी रघुराज को कट्टे सहित शनिवार को पकड़ा गया, लेकिन पूछताछ के चक्कर में गिरफ्तारी रविवार को दिखाई गई।

इसलिए बंद हुए थे आउट ऑफ टर्न प्रमोशन

रिटायर्ड डीएसपी एके तिवारी कहते हैं कि पूर्व डीजीपी नंदन दुबे ने आउट ऑफ टर्न प्रमोशन इसीलिए बंद किए थे, क्योंकि प्रमोशन के लालच में कर्मचारी गई बार गलत एनकाउंटर कर दिया करते थे। श्री तिवारी के अनुसार पुरस्कार देने के लिए अधिकारी पात्र हैं। श्री तिवारी कहते थे कि अक्सर इस तरह के प्रमोशन में अधिकारियों के गनर और कृपापात्र प्रमोशन ले जाते थे। उनके मुताबिक कट्टा अभियान में इनाम भी इससे मिलता जुलता ही है।

अधिकारियों की मंशा उत्साह बढ़ाने की थी

इस मामले में यह जाहिर है कि पुरस्कार की घोषणा करने के पीछे अधिकारियों की मंशा पुलिस कर्मचारियों का उत्साह बढ़ाने और अवैध हथियार रखने के चलन में कमी लाना थी, लेकिन अधिकारियों इस बात का अंदाजा नहीं था कि इस चक्कर में कुछ कर्मचारी जुगाड़ के केस तैयार करने की कोशिश करने लग जाएंगे।