मुरैना। नेशनल हाइवे के किनारे बसे गांवों को अपने यहां से निकलने वाले गंदे पानी के निदान के लिए अपने स्तर पर व्यवस्था करनी होती है। इसका मुख्य कारण है कि नेशनल हाइवे अथॉरिटी अपने हाइवे के नालों में लोकल के नालों का पानी प्रवाहित करने की अनुमति नहीं देती। नूराबाद में इसी उद्देश्य से महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में 12 लाख का नाला स्वीकृत हुआ है।

नूराबाद के लोगों ने प्रशासन से शिकायतें की हैं कि नूराबाद में वित्तीय वर्ष 2018-19 में 12 लाख 82 हजार रुपए से मनरेगा के तहत नाले का काम स्वीकृत हुआ है। गांव के मजदूरों से गांव में पत्थर का पक्का नाला बनवाया जाना था जो गांव के गंदे पानी को गांव से बाहर ले जाकर छोड़े। इस काम के लिए पंचायत को एजेंसी बनाया गया था। लेकिन पंचायत काम ठीक से नहीं कर रही है। ग्रामीणों की मानें तो कस्बे के एक नाले का आधा अधूरा निर्माण करवाने के बाद अंकेक्षण की बारी आई तो पंचायत सरपंच और सचिव ने एक पत्थर पर योजना के अंकेक्षण के तहत स्वीकृत राशि, वर्क आईडी आदि लिखवा दी और अस्थाई रूप से यहां पत्थर लगाकर इसके फोटो जनपद पंचायत को भेज दिए।

उलटा लगाया गया है पत्थर

निर्माण कार्य के बारे में जिस पत्थर पर अंकेक्षण किया जाता है वह ऐसी जगह लगाया जाना चाहिए होता है, जहां से आम लोग आसानी से इसे देख सके। जिला पंचायत की ओर से यह नियम इसलिए लागू किया गया था कि गांव के लोगों को सब कुछ पता रहे। लेकिन नूराबाद पंचायत के इस काम का अंकेक्षण जिस पत्थर पर किया गया है उसे आम रास्ते की तरफ से उलटा करके अस्थाई रूप से लगाया गया है।

इसलिए परेशानी

ग्रामीणों की मानें तो जिस नाले का आधा अधूरा निर्माण कराया गया है उस नाले में जल निकासी बाधित हो रही है। जहां नाला पक्का है वहां पानी तेजी से बहता है और जहां नाला कच्चा है वहां पानी का बहाव थम जाता है और मिट्टी कटनी शुरू हो जाती है। यहां नाला खुला हुआ भी है, जिससे सारा कचरा लोग इसी नाले में ही फेंकते है।

इनका कहना है

एक नाला पहले बनाया था। जिसका कुछ हिस्सा नहीं बन पाया था। उसका बनाया जाएगा। बोर्ड तो हमने नए नाले का लगाया है। उसका निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है।

-अमर सिंह, सचिव नूराबाद पंचायत