मुरैना से शिवप्रताप सिंह जादौन। महाभारत काल के महारथी कर्ण का संबंध चंबल घाटी से है। कर्ण का जन्म जिस कुंतलपुर में हुआ था वह इसी घाटी के मुरैना जिले में है। इस जगह को कुतवार के नाम से जाना जाता था। यहां एक टीले पर 1992 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने खुदाई की तो पता चला कि यह गांव वास्तव में करीब पांच हजार साल पुराना महाभारतकालीन कुंतलपुर है। कई इतिहासकारों ने इस जगह का उल्लेख अपनी किताबों में किया है। वहीं पुरातत्व विभाग भी खुदाई में निकली चीजों की जांच के बाद मान चुका है कि कर्ण मुरैना के कुतवार में ही जन्मे थे।

जिला मुख्यालय से करीब 25 किमी दूर आसन नदी के किनारे स्थित है कुतवार गांव। यहां पर कुंतिभोज किला और कर्णखार नाम के दो स्थान हैं। एक प्राचीन शिवमंदिर भी है, जहां दुर्वासा ऋषि ने चातुर्मास किया था और कुंती को दिव्य मंत्र प्रदान किए थे। महाभारत के वन पर्व में उल्लेख है कि दिए गए 5 मंत्रों में से सूर्य मंत्र का प्रयोग करके कुंती ने देखा तो सूर्य खुद प्रकट हो गए और उन्होंने कुंती को अपने अंशावतार की माता होने का वरदान दिया।

कर्ण ने जब कुंडल और कवच के साथ जन्म लिया तो कुंती ने कर्ण को नदी में लोक लाज के भय से प्रवाहित कर दिया। कुंतलपुर में वह शिवलिंग आज भी है, जिसकी पूजा दुर्वासा ऋ षि ने की थी। जनकथा है कि इस मंदिर के नीचे आसन नदी के किनारे सूर्य ने कुंती को दर्शन दिए थे। इस दौरान सूर्य के तेज से पत्थर पिघल गए और यहां रथ के पहिये और घोड़े के टाप के निशान बन गए।

इसलिए खो गया कुतवार : इतिहासकार कनिंघम, स्मिथ ने जो लिखा है, उसके अनुसार चौथी सदी तक कुतवार समृद्ध नगर रहा है और इसकी ख्याति भी मूल रूप में बनी रही। इन इतिहासकारों की पांडुलिपियों से पता चलता है कि दूसरी सदी से चौथी सदी के बीच मथुरा से नर्मदा नदी के ऊपरी भाग तक नाग शासकों का शासन रहा। मथुरा, कुतवार (कुंतलपुर) और पद्मवती (ग्वालियर के डबरा कस्बे के पास स्थित पवाया) में नागवंशी राजाओं के सिक्के भी मिले हैं।

नागवंश के पतन के बाद कुंतलपुर किसी राज्य का केंद्र नहीं रहा और महत्वहीन होता चला गया। कन्नौज साम्राज्य के विघटन के बाद क्षेत्रीय राजा यहां उभरे, जिनमें नौवीं सदी के बीच कुशवाह राजा वद्रदामा द्वारा ग्वालियर दुर्ग प्रतिहारों से जीत लेने के बाद कुतवार का महत्व गिरता गया। बाद में आक्रांताओं ने इस नगर को पूरी तरह से नष्ट कर दिया और कुतवार जमींदोज हो गया।

पुराने हथियार, मोती भी मिले

कुतवार गांव में एक टीला था। यहां कई बार खुदाई में पुरानी चीजें मिलीं। लोग इसे महाभारत के कर्ण की जन्मस्थली कहते थे। 1992 में यहां भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने खुदाई का काम शुरू किया। यहां से कई पुराने हथियार, मोती, मृदभांड आदि मिले। इनके परीक्षण में पता चला कि यहां मिले अवशेष पांच हजार साल से ज्यादा पुराने थे। यह जगह महाभारत का कुंतलपुर और कर्ण की जन्मस्थली है। - अशोक शर्मा, जिला पुरातत्व अधिकारी, मुरैना