मुरैना, नईदुनिया प्रतिनिधि। जिले में 12 मई को मतदान होना है। इस दौरान पोलिंग बूथ से मतदान प्रतिशत और आवश्यक सूचनाओं का आदान-प्रदान मोबाइल फोन के जरिए होगा, लेकिन इसी जिले के पहाड़गढ़ ब्लॉक के 9 गांव ऐसे हैं, जहां ये काम मोबाइल फोन से नहीं बल्कि हरकारा (रनर) प्रणाली से करवाया जाएगा। यानी पोलिंग से जरूरी संदेश लेकर यहां तैनात हरकारे किसी ऊंचे टीले और पहाड़ी के लिए दौड़ लगाएंगे। यहां मोबाइल फोन सिग्नल पकड़ेगा तब संदेश प्रशासन के अधिकारियों तक पहुंच पाएगा।

पहाड़गढ़ के चांचुल, निचली बेहराई, मानपुर, मरा, रनहेरा, जड़ेरू, कन्हार, काला खेत, धौधा गांव में नेटवर्क की उपलब्धता नहीं है। इस बार निर्वाचन आयोग ने घर बैठे वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने से लेकर मतदान प्रतिशत की जानकारी मोबाइल पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। जब इन 9 गांवों के पोलिंग बूथों पर निरीक्षण के लिए अधिकारी पहुंचे तो उनके मोबाइल फोन ने काम करना बंद कर दिया। यहां की सूचनाएं नोडल अफसरों तक पहुंचाने के लिए प्रशासन ने कई उपाय ढूंढे। मोबाइल टॉवरों की रेंज भी बढ़वाई गई, लेकिन सिग्नल इन गांवों की सीमा को भी नहीं छू सके।

यह करेंगे हरकारे

एसडीएम जौरा विनोद सिंह कहते हैं कि हरकारे यानी रनर के तौर पर गांव के कोटवार और चौकीदार तैनात किए हैं। मतदान का प्रतिशत या जरूरी जानकारी अधिकारियों तक पहंचाने के लिए हरकारे पोलिंग बूथ से 500 मीटर से एक किमी तक साइकिल या बाइक से पहुंचेगे। यहां पहले से ही ऐसे टीले या इमारतों की छत चिन्हित की गई है, जहां नेटवर्क आता हैं। यहां से सूचना भेजकर रनर पोलिंग पर आएंगे।

इतिहास : तुगलक के समय की है प्रणाली

इब्नबतूता ने 14वीं सदी में अपनी भारत यात्रा के वृतांत में हरकारों की संदेश प्रणाली का जिक्र किया है। इब्नबतूता के मुताबिक बादशाह मोहम्मद बिन तुगलक ने हर मील पर एक हरकारा तैनात किया था। लाठी में घंटी बांधे हरकारा संदेश लेकर एक मील तक दौड़ लगाता था और यहां खड़े दूसरे हरकारे को संदेश सौंपता था। जिसके बाद दूसरा हरकारा आगे दौड़ लगाता था। इब्नबतूता के मुताबिक उसके भारत में आने की सूचना हरकारों ने दो दिन में बदशाह तक पहुंचा दी थी। जबकि भारत की तत्कालीन अफगान से सटी सीमाओं से राजधानी का सफर 40 पड़ाव यानी 40 दिन का था।

जिले के 9 गांवों के पोलिंग बूथ हैं, जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं है। ये सभी गांव पहाड़गढ़ के हैं। यहां हमने रनर तैनात किए हैं, जो संदेश लेकर 500 मीटर या 1 किमी दूर ऊंची जगह पर पहुंचेंगे और सूचना देंगे। बाकी जगहों पर नेटवर्क काम कर रहे हैं। - प्रियंका दास, कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी मुरैना