सबलगढ़ (मुरैना), नईदुनिया प्रतिनिधि। Morena News : मुरैना से श्योपुर तक नेशनल हाइवे क्रमांक 552 बनाया गया हैं, जहां मुरैना से सबलगढ़ तक का सफर लोग आसानी से तय कर लेते है। लेकिन सबलगढ़ से आगे का सफर मुश्किलों भरा है। इस नेशनल हाइवे की चौड़ाई महज तीन मीटर रह जाती है। सबलगढ़ से लेकर श्यामपुर तक 25 किमी का सफर तय करने में लोगों को काफी समय खर्च करना पड़ता हैं।

इसकी वजह है कि अगर इस संकरी रोड पर आगे कोई वाहन आ जाए तो उससे साइड लेना भी मुश्किल हो जाता है। खासबात यह है कि इस सड़क को कुछ समय पूर्व ही बनाया गया है। लेकिन इसे चौड़ा न करते हुए पूर्व की रोड पर ही बना दिया गया। जिससे यह मुसीबत खड़़ी हुई हैं। संकरी सड़क होने की वजह से लोग हादसों का शिकार हो जाते है।

गौरतलब है कि नेशनल हाइवे 552 की सबलगढ़ से श्यामपुर तक की सफर खतरों भरा हैं। यह नेशनल हाइवे लगभग श्योपुर तक ही सिंगल रूट का है। लेकिन वाहनों का सबसे ज्यादा दबाव सबलगढ़ से श्यामपुर तक ही रहता है। श्यामपुर से आगे जंगली क्षेत्र होने से व आबादी कम घनी होने से ज्यादा वाहन नहीं चलते। जिससे सिंगल रूट होने के बावजूद बहुत ज्यादा परेशानी नहीं होती।

लेकिन श्यामपुर तक पहुंचने के लिए लोगों को ज्यादा समय व खतरे के साथ ही पहुंचना पड़ता है। एक वर्ष पूर्व ही सड़क निर्माण के नाम पर यहां खाना पूर्ति की गई थी। टैंटरा तिराहे से वीरपुर तक पूर्व में जितनी चौड़ी सड़क थी उसी पर फिर से डामरीकरण कर दिया गया। जिससे समस्या जस की तस बनी हुई है। अब आलम यह है कि अगर सड़क पर आगे बस या कोई अन्य भारी वाहन आ जाए तो उससे साइड लेना नाममुकिन हो जाता है।

लोगों को उसके पीछे उसी की रफ्तार में आगे बढ़ना पड़ता हैं। दूसरी समस्या ग्रामीण इलाकों से गुजरने की वजह हैं इस सड़क के किनारे ही घर बने हुए है। जहां और भी सड़क संकरी हो जाती है। जिससे ग्रामीण इलाकों में सामने से कोई वाहन आ जाए तो जाम ही लग जाता है।

लोगों को कई बार घंटों इस जाम में फंसना पड़ता है। नेशनल हाइवे नाम तो इस सड़क को दे दिया गया। लेकिन हाइवे की सुविधाएं यहां नहीं जुटाई जा सकी। न सड़क चौड़ी हुई और ना ही यहां से अतिक्रमण हटाए गए। जिसकी वजह से आधे घंटे के सफर को तय करने में लोगों को दोगुने से तीन गुना समय खर्च करना पड़ता है।

बारिश होते ही बढ़ जाते हैं हादसे

संकरी सड़क यहां बड़ी मुसीबत हैं, लेकिन दूसरी मुसीबत सड़क के दोनों बने शोल्डर हैं। जो पूरी तरह से कच्चे बने हुए हैं। बारिश होने के साथ ही यह शोल्डर कीचड़ में तब्दील हो जाते हैं जिससे यहां बारिश के बाद हादसे बढ़ जाते हैं। संकरी सड़क होने की वजह से वाहन शोल्डर पर जमा कीचड़ में नहीं जाते, खासतौर पर दुपहिया वाहन। जिसकी वजह से दूसरे वाहनों से भीड़ जाते है। बारिश के मौसम में हादसों की संख्या भी बढ़ जाती है।

नेशनल हाइवे किनारे लगे हैं गंदगी के ढेर

सबलगढ़ से श्यामपुर तक इस नेशनल हाइवे के किनारे कई गांव आते है। हाइवे गांवों के बीचों बीच से गुजरा है। जो यातायात में बड़े बाधक हैं दरअसल ग्रामीण इस संकरी रोड के किनारे ही गोबर के ढेर करते हैं जिससे रास्ता और भी संकरा हो जाता है। जहां ससे वाहन निकलने में भी दिक्कत आती हैं। सबसे ज्यादा परेशानी बाबड़ीपुरा, मानपुर गांव पर देखने को मिलती है।

यह होता हैं वैकल्पिक मार्ग

संकरी सड़क होने से लोग यहां परेशान होते हैं लेकिन इसके लिए वैकल्पिक मार्ग तैयार किया जा सकता है। यहां नहर के किनारे बनाई गई सीसी रोड भी सबलगढ़ से आगे नहीं बनाई गई है। अगर नहर किनारे की सीसी रोड को पूरा बना दिया जाता हैं, तो यह वैकल्पिक मार्ग बन जाएगा। जिससे नेशनल हाइवे की इस संकरी रोड से दबाव कम होगा। भारी वाहन या छोटे चार पहिया वाहन इस रास्ते से होकर गुजर सकते है।