फोटो 8ए। कलेक्टर कार्यालय।

8 बी। रवि जादौन।

8 सी। औतार सिंह।

- अफसर व कर्मचारी लगे हैं चुनाव कार्य में इसलिए लोगों को नहीं मिल रहे दफ्तरों में

मुरैना। विधानसभा चुनाव को लेकर बेशक राजनीतिक सरगर्मियां अभी कम हों, लेकिन प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। हर विभाग के अफसर व कर्मचारी चुनाव कार्य में लगे हैं। हर विभाग के अफसर को चुनाव को लेकर कोई न कोई चुनावी कार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सभी अफसर चुनाव काम में लगे हैं। इन अफसरों के साथ उनके काम में उनके विभाग के कर्मचारी लगे हुए हैं। ऐसे में विभागों के दफ्तरों में न तो अफसर मिल रहे हैं और न ही कर्मचारी। ऐसे में जब लोग इन दफ्तरों में काम के लिए जा रहे हैं तो उनके काम नहीं हो पा रहे हैं। 6 अक्टूबर से सरकारी दफ्तरों में ज्यादा हालत खराब हुई है। क्योंकि 6 अक्टूबर से आचार संहिता लग गई और तब से सभी दफ्तरों में सामान्य लोगों के काम नहीं हो पा रहे हैं।

इस तरह विभागों में नहीं हो रहा है काम

- तहसील कार्यालयः तहसील कार्यालय में लोगों को नामांतरण, खसरा खतौनी की नकल सहित कई प्रमाण पत्र बनवाने के लिए लोग आ रहे हैं। लेकिन तहसील के तहसीलदार के अलावा सभी कर्मचारी किसी न किसी चुनावी जिम्मेदारी को निभा रहे हैं। ऐसे में जब लोग तहसील में पहुंचते हैं तो उनके काम ही नहीं हो पाते हैं।

- नगरनिगमः यही हाल नगरनिगम में है। चुनाव को लेकर मतदान केन्द्रों पर व्यवस्था व संपत्ति विरूपण आदि की कार्रवाई में नगरनिगम के अफसर व्यस्त हैं। ऐसे में नगरनिगम में भी कर्मचारी नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में लोगों के काम नहीं हो पा रहे हैं। खासतौर से बीपीएल कार्ड धारकों को राशन की पर्ची भी मुश्किल से मिल रही है।

- महिला बाल विकासः महिला बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अफसर व परियोजना अफसरों को कई तरह के काम दिए गए हैं। साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मतदाताओं को जागरूक करने के काम में लगे हुए हैं। ऐसे में न तो आंगनबाड़ी सही ढंग से खुल रहे है। साथ ही विभाग के विभिन्ना कार्यक्रम भी नहीं हो पा रहे हैं।

40 हजार से अधिक हैं कर्मचारी

पूरे जिले में विभिन्ना विभागों में 40 हजार से अधिक कर्मचारी काम कर रहे हैं। इसके अलावा कई कर्मचारी व कार्यकर्ता ऐसे हैं जो प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से सरकारी काम काज से मानदेय के आधार पर जुड़े हुए हैं। फिलहाल अभी तक 40 फीसदी कर्मचारियों का उपयोग चुनाव काम में हो रहा है। ऐसे में ये कर्मचार आम लोगों के काम नहीं कर रहे हैं।

क्या कहते हैं लोग

- खरीफ की फसलों को बेचने के लिए पंजीयन कराना है। पंजीयन के खसरा खतौनी की नकल की जरूरत है, लेकिन कर्मचारियों के न होने से नकल नहीं मिल पाई। कई बार चक्करर लगा चुका हूं। नकल न मिलने से पंजीयन नहीं करा पा रहा हूं।

रवि जादौन, सुमावली

- नामांतरण का आवेदन तहसील में दिया हुआ है, लेकिन अभी तक नामांतरण नहीं हुआ है। दो बार से तो सीट पर कर्मचारी ही नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में पता ही नहीं चल रहा है कि जमीन का नामांतरण हुआ है या नहीं।

औतार सिंह, निवासी कैंथरी