मुरैना। ईको सेंटर में पलने वाले घड़ियालों के लिए चंबल का साफ और आवश्यक पोषक तत्वों से युक्त पानी लाने की तैयारी की जा रही है। ईको सेंटर में हुई घड़ियालों की मौत के बाद इस बात पर विचार किया जा रहा है कि पास ही में बहने वाली चंबल नहर से पानी को ईको सेंटर लाया जाए। क्योंकि पूल्स में भरे जाने वाले भूजल के घटकों और चंबल नदी के पानी के घटकों में काफी भिन्नाता होती है।

इसके लिए सीसीएफ ने वन विभाग को प्रारूप तैयार करने के लिए कहा है, जो राज्य स्तर से सिंचाई विभाग के अधिकारियों के समक्ष रखा जाएगा। ईको सेंटर में पहली बार एक साथ 7 घड़ियालों की मौत होने की घटना के बाद अब वन विभाग अब घड़ियालों के लिए जरूरी इंतजामों में कसर नहीं छोड़ना चाहता।

यही वजह है कि अब वन विभाग वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर सेंटर पर नए बदलाव करने जा रहा है। इसके लिए प्रारूप भी तैयार किए जा रहे हैं। इनमें से सबसे अहम योजना घड़ियालों के पूल्स के लिए चंबल के पानी को उपलब्ध कराना है।

सीसीएफ एचएस मोहंता ने पाया कि पूल्स में घड़ियालों के लिए बोरिंग के माध्यम से जमीन का पानी भरा जाता है। इस पानी के घटक नदी के पानी से अलग होते हैं। यही वजह है कि करीब 8 किमी दूर बहने वाली चंबल सिंचाई प्रणाली की एबीसी कैनाल में बहने वाले चंबल नदी के पानी को वन विभाग पाइप लाइन के जरिए ईको सेंटर तक लाने की तैयारी कर रहा है।

हालांकि यह काम इतना आसान नहीं होगा, क्योंकि इसके लिए सिंचाई विभाग की अनुमति आवश्यक होगी। वहीं हाइवे के किनारे एक पाइप लाइन भी बिछानी होगी। अधिकारियों ने इस काम पर आने वाले खर्च आदि का प्रारूप तैयार करने के निर्देश स्थानीय वन अधिकारियों को दिए हैं, ताकि इस प्रारूप को राज्य स्तर पर वन अधिकारी सिंचाई विभाग के अधिकारियों के समक्ष रख सकें।

इसलिए चंबल का पानी

अधिकारियों ने बताया कि चंबल नदी के पानी में घड़ियालों के लिए आवश्यक कई जरूरी घटक हैं। जबकि जमीन के पानी में कई बार हानिकारक घटक मिश्रित होकर आ जाते हैं। ऐसे में साल में दो बार चलने वाले नहर से पानी उपलब्ध होने तक वन विभाग सप्लाई लेगा। इसके बाद आवश्यकता पड़ने पर ही भूजल का दोहन किया जाएगा। इसके लिए वन विभाग सिंचाई विभाग की शार्तों को भी जानना चाहता है।

बदले जाएंगे पूल्स के डिजाइन

सर्दी से बचाव के लिहाज से और तापमान नियंत्रण करने के नजरिए से भी वन विभाग को ईको सेंटर के पूल्स में कुछ खामियां नजर आई हैं। इसलिए अब अधिकारी इन पूल्स के डिजाइन आदि में भी बदलाव करेगा। इसके लिए विशेषज्ञों की सलाह ली जाएगी। आवश्यक बदलाव करने के लिए यहां दोबारा से कुछ निर्माण कार्य किए जाएंगे। इसके लिए भी वन अधिकारियों ने स्थानीय अधिकारियों को प्रारूप तैयार करने के लिए कहा है।

प्रारूप तैयार कर रहे हैं

जब तक नहर चालू रहती है तब तक नहर में बहने वाले चंबल के पानी को हम ईको सेंटर तक लाने की योजना बना रहे हैं। इसके लिए प्रारूप तैयार करवा रहे हैं। चंबल का पानी कई मायनों में घड़ियालों के लिए बेहद फायदेमंद होगा।

एचएस मोहंता, सीसीएफ ग्वालियर